​तालिबानी राजनीति के प्रतिरोध की समस्याएं-अरुण माहेश्वरी

“नाजीवाद एक ऐसी परिघटना है जिसकी कोई तार्किक व्याख्या मुमकिन नहीं है। …आश्विच के सामने इतिहासकार की व्याख्या की ताकत बौनी नजर आती है।“ ( इयान करशॉ – द नाजी डिक्टेटरशिप : पर्सपेक्टिव आफ इंटरप्रिटेशन ; तीसरा संस्करण ; लंदन 1993)  नोटबंदी अर्थ-व्यवस्था पर क्या असर डालेगी, आर्थिक विषयों का […]

​बाबा साहेब आंबेडकर ने संविधान के रूप में इस देश को क्या दिया, दुनिया के सभी जागरूक लोग गर्व करते हैं

देश की आजादी के लगभग सत्तर साल होने को हैं और बाबा साहेब आंबेडकर के 126वें जन्मोत्सव पर देश उनको याद कर रहा है। लेकिन आज भी बहुत सारे लोगों के मन में दलितों को लेकर कुंठा है और वे उन्हें आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहते। इसमें कोई दो […]

भारत में तैयार हो रहे सत्ता की चरम तानाशाही के ढांचे के प्रतिवाद में राष्ट्रपति को ज्ञापन

कांग्रेस सहित विपक्ष के सभी दलों की एक बहुत जरूरी संयुक्त पहल: यह शायद पहला मौका है जब देश की राजनीतिक परिस्थिति के सवाल पर कांग्रेस, सीपीएम, तृणमूल कांग्रेस, सीपीआई, आरजेडी, जेडीयू, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, एनसीपी, डीएमके, जेएमएम आदि 13 राजनीतिक दलों ने एक मंच पर इकट्ठा होकर […]

​क़ानून का शासन. मंदी और आम लोगों की आर्थिक स्थिति का संबंध -अरुण माहेश्वरी

आज हम देश में एक ऐसी सरकार को देख रहे हैं, जो क़ानून के शासन को कमज़ोर करने पर तुली हुई है । गुजरात में जिस प्रकार 2002 के जन-संहार और फिर बेक़सूर लोगों के फ़र्ज़ी इनकाउंटर के अपराधियों को बचाने की कोशिशें आज भी जारी है, वहीं लोग केंद्र […]

​योगी और कैकयी का मनोरथ-अरुण माहेश्वरी

सत्ता पाते ही योगी आदित्यनाथ ने जनतंत्र के राजा जनता जनार्दन को अपना कैकयी रूप दिखाना शुरू कर दिया है। उन्हें उत्तरप्रदेश नहीं, ‘हिंदू राष्ट्र’ चाहिए ! मानस में कैकयी दशरथ से कितने प्रेम से कहती है –   सुनहु प्रानप्रिय भावत जी का । देहु एक बार भरतहि टीका […]

​गोरक्षा का विषय हिंदू धर्म पर आरएसएस के वर्चस्व का हथियार बन चुका है -अरुण माहेश्वरी

​गोरक्षा का विषय हिंदू धर्म पर आरएसएस के वर्चस्व का हथियार बन चुका है -अरुण माहेश्वरी भारत के सबसे प्राचीन धर्मग्रंथ ऋगवेद के काल से ही यहां के धार्मिक कर्मकांडों में गोवंश के पशुओं के वध और भारत के लोगों की खान-पान की आदतों में उनके मांस के शामिल होने […]