​राजनीति के सारे सवाल मोदी-शाह-संघ धुरी में सिमट गये हैं

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(दिल्ली नगर निगमों के चुनाव परिणामों पर एक टिप्पणी)  ✍-अरुण माहेश्वरी वरिष्ठ लेखक/स्तंभकार दिल्ली नगर निगमों के चुनाव परिणाम अरविंद केजरीवाल या अजय माकन के लिये भले कोई रहस्य या पहेली हो, हमारे लिये इसमें कोई रहस्य नहीं था। आज की भारतीय राजनीति में मोदी-शाह-संघ तिकड़ी ने अपार धनबल और […]

​पत्रकारिता के ये जवाबी पत्थरबाज !

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भारतीय पत्रकारिता में सत्ताधारियों का ढोल बजाने वाले स्तंभकारों में तवलीन सिंह मौकापरस्त दक्षिणपंथियों की एक खास पहचान होती है कि जो है, या चलन में है, उसे ही परम सत्य मान कर उसकी पूजा-आराधना में जुट जाओ।  भारतीय पत्रकारिता में ऐसे, सत्ताधारियों का ढोल बजाने वाले मूढ़मति स्तंभकारों में एक शीर्षस्थ नाम […]

संघ परिवार और भाजपा बना “अर्धनारीश्वर” कांग्रेस कल्चर के मिश्रण से 

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​भाजपा का कल्चर भी अब कांग्रेसी हो गया है। पिछले तीन बरस में कांग्रेस के हाथ का साथ छोड़कर बीजेपी के कमल को थामने वाले कांग्रेसियों का आगमन निरंतर चल रहा है अब थमने का नाम नहीं के रहा। भाजपा और आरएसएस ने नारा दिया था कांग्रेस मुक्त भारत।  अब […]

​पर्रीकर साहब को घबड़ाहट क्यों होती है ! -अरुण माहेश्वरी

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               ✍संपादकीय सचमुच यह देख कर भारी हैरानी होती है कि कितनी आसानी से पूर्व प्रतिरक्षा मंत्री, अभी गोवा के मुख्यमंत्री, मनोहर पार्रीकर ने कह दिया कि वे प्रतिरक्षा मंत्रालय इसलिये छोड़ कर आ गयें क्योंकि कश्मीर की स्थिति बेकाबू हो गई थी !  […]

​धर्मक्षेत्रे संघक्षेत्रे की ओर बढ़ता देश..!

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यह वाकई सोचने पर मजबूर करता है कि भारी जनादेश से चुने गए 325 विधायकों में से भाजपा के पास क्या एक भी नेता इस लायक नहीं था जो उत्तर प्रदेश की कमान संभाल सके। अगर इन सबमें से कोई भी नेता इस काबिल नहीं था तो क्या यह माना […]

साम्राज्यवाद मुर्दाबाद ! डोनाल्ड ट्रंप मुर्दाबाद ! -अरुण माहेश्वरी

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​साम्राज्यवाद मुर्दाबाद ! डोनाल्ड ट्रंप मुर्दाबाद !  अमेरिका ने अफगानिस्तान पर अपने अब तक के सबसे बड़े गैर-नाभकीय शस्त्र का प्रयोग किया है, नंगारहार की पहाड़ियों में तालिबानियों के कुछ अड्डों को खत्म करने के लिये।

​तालिबानी राजनीति के प्रतिरोध की समस्याएं-अरुण माहेश्वरी

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“नाजीवाद एक ऐसी परिघटना है जिसकी कोई तार्किक व्याख्या मुमकिन नहीं है। …आश्विच के सामने इतिहासकार की व्याख्या की ताकत बौनी नजर आती है।“ ( इयान करशॉ – द नाजी डिक्टेटरशिप : पर्सपेक्टिव आफ इंटरप्रिटेशन ; तीसरा संस्करण ; लंदन 1993)  नोटबंदी अर्थ-व्यवस्था पर क्या असर डालेगी, आर्थिक विषयों का […]

​बाबा साहेब आंबेडकर ने संविधान के रूप में इस देश को क्या दिया, दुनिया के सभी जागरूक लोग गर्व करते हैं

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देश की आजादी के लगभग सत्तर साल होने को हैं और बाबा साहेब आंबेडकर के 126वें जन्मोत्सव पर देश उनको याद कर रहा है। लेकिन आज भी बहुत सारे लोगों के मन में दलितों को लेकर कुंठा है और वे उन्हें आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहते। इसमें कोई दो […]

भारत में तैयार हो रहे सत्ता की चरम तानाशाही के ढांचे के प्रतिवाद में राष्ट्रपति को ज्ञापन

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कांग्रेस सहित विपक्ष के सभी दलों की एक बहुत जरूरी संयुक्त पहल: यह शायद पहला मौका है जब देश की राजनीतिक परिस्थिति के सवाल पर कांग्रेस, सीपीएम, तृणमूल कांग्रेस, सीपीआई, आरजेडी, जेडीयू, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, एनसीपी, डीएमके, जेएमएम आदि 13 राजनीतिक दलों ने एक मंच पर इकट्ठा होकर […]

​क़ानून का शासन. मंदी और आम लोगों की आर्थिक स्थिति का संबंध -अरुण माहेश्वरी

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आज हम देश में एक ऐसी सरकार को देख रहे हैं, जो क़ानून के शासन को कमज़ोर करने पर तुली हुई है । गुजरात में जिस प्रकार 2002 के जन-संहार और फिर बेक़सूर लोगों के फ़र्ज़ी इनकाउंटर के अपराधियों को बचाने की कोशिशें आज भी जारी है, वहीं लोग केंद्र […]