सरस्वती वंदना / सतीश शुक्ला ‘रक़ीब’

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​-: सरस्वती वंदना :- तेरे द्वारे आऊँ माँ नितनित शीश नवाऊँ माँ   कुछ अपनी, कुछ जग बीती  दुनिया को बतलाऊँ माँ   गुलदस्ते मैं ग़ज़लों के  चरणों तक पहुँचाऊँ माँ   वाणी में बस जाना तुम गीत, ग़ज़ल जब गाऊँ माँ   मेरी अभिलाषा है ये   तेरा सुत […]

​नहीं लिखूंगी कविता – सरिता

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​नहीं लिखूंगी  कविता  या फिर नहीं लिख पाउंगी  जो सपने  कविता से तैरते थे  मेरी आँखों में  धुलने लगे हैं सब  मैं जब बीनती थी चावल से कंकड़  सीचती थी कपड़े  लाती थी पानी तीन कोस से  गोबर से  लीपती थी आंगन  तब भी कविता में मैं  और मुझमे  बसती […]

​दंगा और दादी माँ

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​दंगा और दादी माँ अंगीठियाँ और चूल्हे  अन सुलगे  ही रहे  सुलगता रहा  दादी माँ का दिल  जब रह – रह कर  उठा था धुंआ  मेरे शहर से . बूढ़े संस्कार  वृक्षों से भी वक्त आये  झड़  जाते हैं पत्ते  पर समझ नहीं पाया मेरे बाबा के बूढ़े संस्कार  क्यों […]