गुजरात विधानसभा में राहुल गांधी अपेक्षाकृत ज्यादा परिपक्व दिखे।   

गुजरात विधानसभा चुनाव को राहुल गांधी के नेतृत्व की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा था। ऐसे में सवाल उठता है कि राहुल और कांग्रेस को इस विधानसभा चुनाव से क्या हासिल हुआ? विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले भाजपा जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त थी, लेकिन कांग्रेस ने सत्तारूढ़ पार्टी को कड़ी टक्कर दी। कांग्रेस गुजरात चुनाव से पहले से ही नेतृत्व संकट से गुजर रही थी। गुजरात चुनाव में राहुल ज्यादा सशक्त बनकर सामने आए।परिपक्व नेता के रूप में सामने आए राहुल: गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी एक परिपक्व नेता के रूप में सामने आए। प्रचार अभियान के दौरान उन्होंने कोई भी विवादस्पद बयान नहीं दिया। अपनी प्रत्येक जनसभा में उन्होंने सरकार की नीतियों से जुड़ा सवाल ही उठाया। कांग्रेस नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लगातार उनकी आर्थिक नीतियों पर सवाल पूछे। गुजरात में भाजपा के 22 साल पर उन्होंने 22 हिस्सों में मोदी और भाजपा से जवाब मांगे।

संगठन के तौर पर भी दिखा बदलाव: विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस में संगठन के स्तर पर भी बदलाव दिखा। राहुल जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करने के लिए चुनाव से महीनों पहले ही राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को गुजरात भेज दिया था। गहलोत को बकायदा एक टीम भी दी गई थी, जिससे उन्हें किसी तरह की दिक्कत न हो। इसके अलावा संवादहीनता की स्थिति से निपटने की भी व्यवस्था की गई थी। राहुल गांधी और गुजरात चुनाव टीम के बीच खासतौर पर सीधी बातचीत की व्यवस्था की गई थी।

चुनावी गठजोड़ में दिखाई समझबूझ: चुनावी गठबंधन को लेकर कांग्रेस की ओर से पिछले कुछ चुनावों में लगातार कुछ न कुछ कमी दिखती रही थी। गुजरात विधानसभा चुनाव में इस स्तर पर काफी सुधार देखा गया। राहुल ने इसमें खुद दिलचस्पी ली और हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवाणी और अल्पेश ठाकोर जैसे युवा नेताओं से गठजोड़ किया। इतना ही नहीं पार्टी ने उनके लिए सीट भी मुहैया कराई थी। इससे कांग्रेस काफी हद तक जाति समीकरण को साधने की सफल कोशिश की।  सही रणनीति के साथ चुनाव प्रचार: गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पहले के मुकाबले बेहतर रणनीति के साथ मैदान में उतरी थी। प्रचार अभियान के दौरान राहुल कई मंदिरों में गए थे जो चर्चा का विषय बना। इसका उद्देश्य वोटों के ध्रुवीकरण को रोकना था। मुस्लिम समुदाय में कांग्रेस पहले से ही पैठ बनाए हुए है। चुनाव प्रचार के दौरान उनके ‘जनेऊधारी पंडित’ होने का मुद्दा भी उछला था।

आक्रामकता के साथ दिया संयम का परिचय: गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल के तेवर में भी बदलाव दिखा। उन्होंने आक्रामकता के साथ संयम का भी परिचय दिया। भजापा के लगातार जुबानी हमला करने के बावजूद कांग्रेस नेता ने अपना संयम नहीं खोया। यहां तक कि वह अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं को भी संयम बरतने की नसीहत देते रहे।

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