फोर्टिस अस्पताल PपापPप्रबंधन के ख़िलाफ़ हरियाणा पPपपपके स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कड़ा रुख अपनाया

चंडीगढ़ में बुधवार को स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए। साथ हैं विभाग के प्रधान सचिव अमित झा।

दिल्ली के द्वारका निवासी सात वर्षीय डेंगू पीड़ित अद्या सिंह की मृत्यु के बाद फोर्टिस अस्पताल प्रबंधन द्वारा उसके परिजनों को भारी भरकम बिल भेजने के प्रकरण में जांच कमेटी की रिपोर्ट बुधवार सुबह स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को सौंप दी गई। 49 पेज की रिपोर्ट के साथ 112 पेज के दूसरे दस्तावेज भी संलग्न हैं। रिपोर्ट पढ़ने के बाद विज ने इसे सार्वजनिक किया। रिपोर्ट से पता चला कि फोर्टिस अस्पताल ने अद्या सिंह का इलाज शुरू करने से पहले उसके पिता जयंत सिंह से कंसेंट फार्मों पर हस्ताक्षर करवाए। कंसेंट फार्मों पर उनके फर्जी हस्ताक्षर थे। बता दें कि रिपोर्ट मंगलवार को विज के पास आनी थी, मगर जब रिपोर्ट नहीं पहुंची तो उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को कड़ी फटकार लगाई थी।

स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने रिपोर्ट के हवाले से बताया कि जयंत ने जांच कमेटी के सामने कहा कि एक फार्म पर जरूर उसके हस्ताक्षर हैं लेकिन बाकी के साइन उन्होंने किए ही नहीं। विज ने कहा यह 420 का मामला है। विज के अनुसार, रिपोर्ट में फोर्टिस अस्पताल के खिलाफ गंभीर आरोप हैं और सख्त कार्रवाई होगी। नियमों के अनुसार जिन प्राइवेट अस्पतालों को रियायती दरों में सरकारी जमीन अलॉट की जाती है, उन्हें 20 प्रतिशत आर्थिक रूप से पिछड़े (ईडब्ल्यूएस) परिवारों का मुफ्त उपचार करना होता है। रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल ने इसका उल्लंघन किया और उसके पास इसका कोई रिकार्ड नहीं था। विज ने कहा, हूडा को इसके लिए पत्र लिखा जाएगा और सभी प्राइवेट अस्पतालों में इसे सुनिश्चित कराने के आदेश दिए जाएंगे। जमीन देते समय हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हूडा) द्वारा एमओयू साइन किया जाता है। एमओयू की शर्तें चेक की जाएंगी। अगर शर्तों में नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों की लीज रद्द करने का प्रावधान होगा, तो फोर्टिस अस्पताल के खिलाफ यह कार्रवाई भी की जाएगी।

सीएमओ ने भेजा नोटिस: नियमानुसार डेंगू मरीजों के बारे में प्राइवेट अस्पतालों को स्थानीय सिविल सर्जन (सीएमओ) को सूचना देनी होती है। लेकिन फोर्टिस अस्पताल ने यहां भी नियम तोड़े। विज ने कहा कि गुरुग्राम सीएमओ ने अस्पताल को नोटिस भेजा है।

दवाइयों के रेट 108 फीसदी अधिक 

विज ने बताया कि अद्या सिंह को ऐसी दवाइयां दी गई जिनका कोई औचित्य नहीं था। अस्पताल में उसे 25 बार प्लेटलेट्स चढ़ाए गए। 17 बार 400 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से प्लेटलेट्स की कीमत बिल में जोड़ी गई। वहीं 8 बार चढ़ाए गए प्लेटलेट्स का बिल 2000 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से बनाया गया। एक ही अस्पताल में प्लेटलेट्स यूनिट के रेट अलग-अलग कैसे हो सकते हैं। विज के अनुसार अस्पताल ने दवाइयों में 108 प्रतिशत तक अधिक कीमत वसूली है। कई दवाओं में तो 1737 प्रतिशत तक अधिक रेट लगाए गए हैं।

मौत नहीं, मर्डर

विज ने अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही देखते हुए कह दिया है कि अद्या की मौत नहीं हुई बल्कि यह एक मर्डर है। जयंत सिंह जब उसे फोर्टिस से वापस रॉकलैंड लेकर जाना चाहते थे तो उसे एम्बुलेंस तो मिली लेकिन ऐसी जिसमें वेंटीलेटर तक नहीं था।  इस तरह के मामलों में एडवांस लाइफ स्पोर्ट सिस्टम एम्बुलेंस का इस्तेमाल करना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। एम्बुलेंस में बच्ची को एम्बु बैग तक उपलब्ध नहीं कराया गया, जिसकी वजह से उसकी मौत हुई। फोर्टिस ने आईएमए के प्रोटोकॉल का भी उल्लंघन किया है। इसके लिए आईएमए को भी कार्रवाई के लिए सरकार लिखेगी। बता दें कि मामले की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. राजीव वढेरा की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की।

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