बासू ने कहा “मैं खुशनसीब हूं, कि मैं अब एक विश्वविद्यालय छात्रा हूं। मैं उनकी शक्ति के आगे और बाध्य नहीं हूं।”   

कोलकाता के जीडी बिरला स्कूल में चार वर्षीय छात्रा के साथ शिक्षकों द्वारा यौन शोषण किए जाने का मामला विदेशों तक पहुंच चुका है। इस स्कूल की पूर्व छात्रा रुकपथा बासू जो कि फिलहाल टॉरंटो यॉर्क यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही हैं, उन्होंने अपना स्कूली अनुभव सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए एक बहुत बड़ा खुलासा किया है। छात्रा का कहना है कि स्कूल के वाइस प्रिंसिपल लड़कियों द्वारा रंगीन ब्रा पहनने के पीछे लड़कियों का एक खास मकसद बताते थे। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार मनोविज्ञान की छात्रा बासू ने अपने पोस्ट में लिखा “स्कूल प्रशासन झूठ बोलता है। वे बहुत ही ताकतवर लोग हैं। वे आपको घूस देंगे, ब्लैकमेल करेंगे और खुद पर लगे आरोपों से सीधा इनकार करेंगे। वे अपने प्रशासन पर उठते सवालों पर आपको चुप कराएंगे।”
बासू ने कहा “उन्होंने मुझे और मेरी क्लासमेट को पूरे स्कूल की जिंदगी में चुप कराकर रखा था। इसी तरह वे अभी भी अपने छात्रों से चुप रहने और हाल ही में हुए अपराध पर कुछ भी बोलने से इनकार कर रहे हैं। मैं खुशनसीब हूं कि मैं अब एक विश्वविद्यालय छात्रा हूं। मैं उनकी शक्ति के आगे और बाध्य नहीं हूं। अब उन्हें कोई अधिकारी नहीं है कि वे मुझे सच बोलने पर बोर्ड परीक्षा में सस्पेंड कर दें। आज मैं बोलूंगी और मैं अब और चुप नहीं रह सकती। कई सालों से उन दीवारों के पीछे हर प्रकार का नैतिक उल्लंघन किया जा रहा है। मैं उन्हें एक सूचीबध तरीके से सामने ला रही हूं क्योंकि मुझे लगता है कि लोगों को उनके बारे में जानने का पूरा अधिकार है। हमें गाली दी गईं, अपमान किया गया और हमारे चरित्र पर भी सवाल उठाए गए।”
बासू के अनुसार छात्रों को चुप कराने के लिए उनके परीक्षा में नंबर काटने और परीक्षा का एडमिट कार्ड न देने जैसी धमकियां दी जाती हैं। बासू ने कहा “मेरे 14 साल के स्कूली समय में मैंने देखा है कि जो स्कूल के सबसे बेस्ट टीचर होते थे उन्हें स्कूल छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया जाता था। एक ऐसा स्कूल वाइस प्रिंसिपल जो कि लड़कों के सामने आपकी ब्रा के रंग को लेकर बात कर सकता है।” इस पर बात करते हुए बासू ने कहा “हमरी पीटी की कमीज सफेद थी। कमीज का कपड़ा बहुत ही पतला था जिसके कारण कई लड़कियों की ब्रा नजर आती थी।” बासू ने आरोप लगाया कि वाइस प्रिंसिपल ने सभी के सामने, जहां पर लड़के भी मौजूद थे, उन्होंने लड़कियों द्वारा रंग-बिरंगी ब्रा को पहनना एक मकसद के तहत बताया और उनके चरित्र पर भी सवाल उठाए।”

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