राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की मौजूदगी के बावजूद इससे दूरी बना ली। राष्ट्रपति प्रोटोकॉल को भी किया गया अनदेखा।

    गीता की धरती कुरुक्षेत्र में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के उद्घाटन के साथ ही हरियाणा कैबिनेट में नया संग्राम छिड़ने के आसार दिख रहे हैं। प्रदेश के अधिकांश वरिष्ठ मंत्रियों ने शनिवार को कार्यक्रम को देखते हुए अपना दिन खाली रखा था, लेकिन समारोह में अपनी कोई भूमिका न देखकर उन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की मौजूदगी के बावजूद इससे दूरी बना ली।

   हैरानी की बात यह है कि प्रोटोकाॅल के तहत राष्ट्रपति की अगवानी अंबाला के एयरफोर्स बेस पर की जानी थी और इसमें स्थानीय विधायक का होना अनिवार्य था। 

   जब इस संबंध में अंबाला कैंट से विधायक व कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्री अनिल विज से जानना चाहा तो उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि उन्हें इस संबंध में न तो कोई अाधिकारिक जानकारी दी गई और न ही उनके पास वहां जाने की अनुमति भेजी गई।  अपनी बेबाकी के लिए प्रसिद्ध विज ने इशारों-इशारों में कहा, हरियाणा में मंत्री तो केवल एक ही हैं, बाकी तो सब संतरी हैं।
  मुख्यमंत्री के सबसे करीबी मंत्रियों में शुमार पीडब्ल्यूडी मंत्री राव नरबीर सिंह आैर सहकारिता राज्य मंत्री मनीष ग्रोवर ने भी इतने बड़े आयोजन से दूरी बनाए रखी। नरबीर जहां गुरुग्राम में थे, वहीं ग्रोवर चंडीगढ़ और पंचकूला में शादियों में शिरकत करते दिखे। कर्णदेव काम्बोज, वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ और उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री विपुल गोयल की गैर-मौजूदगी भी चर्चाओं में रही। 
   कई बार प्रयास करने के बाद भी अभिमन्यु, धनखड़, विपुल व नरबीर से सपंर्क नहीं हो सका। वहीं दूसरी ओर, वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के अाधिकारिक सूत्र ने कहा, मंत्रीजी की तबीयत खराब है और वे सुबह से ही चंडीगढ़ कोठी में आराम कर रहे हैं। एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा, अब यह मामला दिल्ली दरबार तक पहुंच गया है।

समारोह में कोई भूमिका न मिलने पर बढ़ी नाराजगी

  अपनी उपेक्षा से नाराज एक मंत्री ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, भाजपा मंत्रिमंडल में सभी को ‘अर्जुन’ बनाने की मंशा है कि वे केवल ‘उपदेश’ सुनें। मंत्री ने कहा, 17 से 30 नवंबर तक चलने वाले इस समारोह में रोजाना एक मंत्री को अतिथि बनाकर सम्मान देना संभव था, लेकिन मुख्यमंत्री और उनकी ‘किचन कैबिनेट’ मंत्रियों की भूमिका केवल भीड़ में बैठकर तालियां बजाने तक ही सीमित करने के फार्मूले पर काम कर रही है। एक राज्य मंत्री से इस कार्यक्रम में भाग नहीं लेने के बारे में सवाल किया तो उन्होंने कहा, गीता जयंती को बाबे ही संभाल लेंगे। हमारे पास बाबे बहुत हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *