देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि मैटिरियललिज्म और प्रतिस्पर्धा से घिरी डिजीटल युग की युवा पीढ़ी में तनाव, असुरक्षा और दुविधाएं बढ़ रही हैं। ऐसे में गीता उनके लिए आध्यात्मिक औषधि सिद्ध होगी। 

  श्री कोविन्द आज कुरूक्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय विचार गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में देश-विदेश से आए हुए लोगों को संबोधित कर रहे थे। 

   उन्होंने कहा कि गीता का संदेश देश और काल से ऊपर है और प्राचीन कालीन कृषि आधारित समाज से लेकर परवर्ती काल में वाणिज्य और उद्योग पर आधारित समाज तक और उसके भी बाद की नोलेज सोसायटी तक गीता की प्रासंगिकता हर युग में रही है और आगे भी बनी रहेगी। 


उन्होंने कहा कि आधुनिक युग में, पश्चिम में अमेरिका से लेकर पूर्व में जापान तक, योग की लोकप्रियता योगशास्त्र गीता की अंतर्राष्ट्रीय और युगातीत प्रासंगिकता को रेखांकित करती है। आज के डिजीटल युग में गीता के संदेश को पूरे विश्व में प्रसारित करना और भी आसान हो गया है।  उन्होंने कहा कि पूरी मानवता के लिए योगशास्त्र गीता अत्यंत उपयोगी है। विश्व समुदाय 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का निर्णय सहजता और शीघ्रता के साथ इसीलिए कर पाया कि योग पूरी मानवता के कल्याण के लिए है। गीता पूरे विश्व के लिए आध्यात्मिक दीप स्तम्भ है। अध्यात्म भारत की आत्मा है जो पूरे विश्व के लिए भारत का उपहार है। गीता भारतीय अध्यात्म का सबसे लोकप्रिय और प्रसिद्ध ग्रंथ है। 

राष्ट्रपति ने कहा कि महाभारत के सबसे महत्वपूर्ण खंड को महाकवि वेदव्यास ने स्त्रीलिंग का चयन कर श्रीमद् भगवद्गीता कहा। इतने महान शब्द-शिल्पी ने स्त्रीलिंग का चयन, संभवत: मातृ-शक्ति की गरिमा को मान्यता देने की नीयत से ही किया होगा। इसे आज महिला सशक्तिकरण कहते हैं। इसी सोच के अनुरूप हरियाणा सरकार ने राज्य में स्त्री शक्ति को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। वर्ष 2011 में हरियाणा में 1,000 लडकों की तुलना में 830 लडकियां ही हुआ करती थीं। जनवरी 2015 में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत के बाद अब लड़कियों का यह लिंग अनुपात बढक़र 937 हो गया है। 
उन्होंने कहा कि जैसा कि हम सब जानते हैं, हरियाणा की बेटियां राज्य का और देश का गौरव बढाती रही हैं। भारतीय लोकतंत्र पर महिला राजनेता के रूप में अपनी अमिट छाप छोडऩे वाली हरियाणा की सुषमा स्वराज केवल 25 वर्ष की कम आयु में ही विधायक बनने और राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त करने में सफल हुई थीं। अपने अत्यंत प्रभावशाली राजनैतिक जीवन के वर्तमान चरण में भारत की अब तक की दूसरी महिला विदेश मंत्री के रूप में उन्होंने वैश्विक-पटल पर भारतीयता का, अपनी प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता की छाप छोड़ी है। ऐसा उदाहरण भारतीय लोकतन्त्र में बहुत कम देखने को मिलता है। 
उन्होंने कहा कि कल्पना चावला ने अंतरिक्ष तक जाकर हरियाणा की बेटियों की क्षमता का परिचय दिया और जन-मानस में हमेशा के लिए अमर हो गयी। संतोष यादव ने एवरेस्ट की चोटी पर दो बार तिरंगा फहराया। कुश्ती में साक्षी मलिक तथा गीता, बबिता और विनेश फोगाट बहनों ने देश का गौरव बढ़ाया है। परिणीती चौपड़ा कला जगत के साथ-साथ पर्यटन की ब्रांड एम्बेस्डर के रूप में सफलता प्राप्त कर रही हैं। हरियाणा की बेटियों की सफलता की यह यात्रा यहीं नहीं रुकी। हाल ही में झज्जर की मानुषी छिल्लर ने विश्वस्तरीय सम्मान अर्जित करके दुनियाभर में हरियाणा और भारत की साख बढाई है। बेटी मानुषी ने अपनी मां, और सभी माताओं के अमूल्य त्याग और प्रेरणा के कारण मातृत्व को सर्वश्रेष्ठ प्रोफेशन का दर्जा देकर, भारत और हरियाणा के सांस्कृतिक मूल्यों को पूरी दुनिया के सन्मुख प्रस्तुत किया है और समाज के निर्माण में महिलाओं के योगदान को रेखांकित किया है। हरियाणा की इन बेटियों ने राजनीति से लेकर पर्वतारोहण तक, खेल के मैदान से लेकर अन्तरिक्ष तक तथा शिक्षा से लेकर सौन्दर्य प्रतियोगिताओं तक, अपनी उच्च कोटि की प्रतिभा के माध्यम से हरियाणा और भारत का गौरव बढ़ाया है और भी कई ऐसी बेटियों के नाम हैं, जिनमें से कुछ का ही उन्होंने उल्लेख किया है। हमें हरियाणा की धरती पर जन्मी इन बेटियों पर गर्व है। 
राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने इन बेटियों का उदाहरण इसलिए दिया है कि ये सभी गीता के कर्मयोग का ज्वलंत उदाहरण हैं। मुझे लगता है कि गीता के सार को अपने जीवन में ढालकर ही वे आगे बढी हैं। भविष्य की चिंता न करते हुए, एकाग्रचित्त होकर, अपने कर्तव्यों का निरंतर निर्वहन करना गीता का मुख्य संदेश है। ऐसा कहा जाता है कि महाभारत के युद्ध में, न्याय के पक्ष में पांडव थे, जो केवल पांच गांव दे दिये जाने पर ही शांति के लिए सहमत थे। परंतु कौरवों ने सुई की नोक के बराबर भूमि भी न देने का अन्याय का मार्ग अपनाया और फिर महाभारत का युद्ध हुआ। वह युद्ध केवल कौरवों की ग्यारह और पांडवों की सात अक्षौहिणी सेनाओं के बीच नहीं था। वह अन्याय के विरुद्ध न्याय और अत्याचार के विरुद्ध सदाचार का युद्ध था। घोर अन्याय के विरुद्ध उस संघर्ष में अंतत: विजय पाने वाले पांडवों की सबसे बड़ी शक्ति थे, श्री कृष्ण तथा गीता का अमर और जीवंत उपदेश। 
उन्होंने कहा कि अनैतिकता और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष में गीता के प्रभाव के उदाहरण आधुनिक इतिहास में भी उपलब्ध हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी गीता को अपनी आंतरिक शक्ति और विवेक का स्रोत मानते थे और गीता का उल्लेख माता के रूप में करते थे। अपनी आत्मकथा में गांधी जी ने लिखा है कि जैसे अंग्रेजी के कठिन शब्दों के अर्थ के लिए वे डिक्शनरी खोलते थे वैसे ही जीवन की दुविधाओं का समाधान पाने के लिए वे गीता का सहारा लेते थे। यह कहा जा सकता है कि गीता एक सम्पूर्ण जीवन-संहिता है। उन्होंने कहा कि हर मनुष्य के अंदर सही और गलत के बीच होने वाले द्वंद्व का गीता समाधान देती है। सही क्या है और गलत क्या है? हम क्या करें और क्या न करें? यह अंतद्र्वंद्व सबको परेशान करता है। ऐसे दोराहों पर सही और गलत के बीच चुनाव करने का विवेक गीता में ही मिलता है। 
राष्ट्रपति ने कहा कि गीता योगशास्त्र है। गीता में निहित योग समस्त मानव जाति के हित के लिए है। गीता में युद्ध का परिदृश्य तो है, पर वैर-भाव नहीं है। युद्धक्षेत्र में हुए स्वामी ज्ञानानंद जी के विद्वत्तापूर्ण विचार सुने। उन्होंने कहा कि हमारा प्रत्येक कर्म, योग भी हो सकता है और भोग भी। यह हमारा चुनाव है कि हम इसे कर्मयोग बनाएं या कर्मभोग। जिस कर्म को हम स्वार्थ और सुख के लिए करते हैं वह कर्मभोग बन जाता है और जब हम परोपकार के लिए कर्तव्य भाव से कर्म करते हैं तो यह कर्मयोग बन जाता है। महात्मा गांधी ने कहा था भारत अपने मूल स्वरूप में कर्मभूमि है, भोगभूमि नहीं। कर्मयोग हमें भोगमुक्त करता है और लोककल्याण में लगाता है। 
उन्होंने कहा कि कर्मयोग में मन को समभाव के साथ शांत और स्थिर रखने की आवश्यकता होती है। जो सामने उपस्थित है उस कर्म को पूरी निष्ठा से करना होता है। शांत और स्थिर मन से किया गया काम अच्छे परिणाम देता है, मनोबल बढ़ाता है और जीवन में आगे बढने के रास्ते निकालता है। उन्होंने कहा कि वे एक बार फिर हरियाणा की बेटियों की याद दिलाते हैं, क्योंकि उन्होंने यही किया है और अपने जीवन में आगे बढी हैं। उनका यह मानना है कि जो व्यक्ति गीता को अपने आचरण में ढालेगा वह झंझावात में भी स्थिर रहेगा, शांत रहेगा और सफल रहेगा।    
राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रपति के रूप में हरियाणा की यह उनकी पहली यात्रा है। भारतीय परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण इस धर्मक्षेत्र-कुरुक्षेत्र में आयोजित, अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के अवसर पर, यहां आकर उन्हें हार्दिक प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 से, बडे पैमाने पर गीता महोत्सव का आयोजन करने की पहल के लिए वे मुख्यमंत्री मनोहर लाल और हरियाणा सरकार की सराहना करते हैं।  उनका यह मानना है कि गीता नैतिकता और न्याय के विजय का संदेश देती है, और इस समारोह के द्वारा गीता का यह संदेश प्रसारित हो रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें बताया गया है कि इस वर्ष के आयोजन में ‘मारिशस भागीदार’ देश है और उत्तर प्रदेश ‘भागीदार राज्य’ है और वे मारिशस और उत्तर प्रदेश के कलाकारों और सहयोगियों की भी सराहना करते हैं। 
उन्होंने कहा कि यह अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव हरियाणा के, भारत के और पूरी मानवता के नैतिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का उत्सव है और वे इस आयोजन के लिए राज्य सरकार को, आयोजकों को और हरियाणा की जनता को बधाई देते हैं और आशा करते हैं कि गीता के सन्देश को सभी भारतवासी अपने आचरण में ढाल कर एक बेहतर राष्ट्र और बेहतर विश्व के निर्माण में अपना योगदान देते रहेंगे। 
इस अवसर पर हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि उन्हें इस कार्यक्रम में आकर अपार खुशी हो रही है और अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव अनौपचारिक रुप से 17 नवंबर को शुरू हो गया और यह आगामी 3 दिसंबर, 2017 तक चलेगा। उन्होंने कहा कि इस महोत्सव के प्रमुख कार्यक्रम 25 नवंबर से 30 नवंबर के बीच आयोजित किए जाएंगें। उन्होंने गीता को 21वीं सदी की आवश्यकता बताते हुए कहा कि हरियाणा सरकार ने गीता को अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप दिया हैं। उन्होंने कहा कि आज का युग डिजीटल और तकनीक का युग हैं ओर इसमें गीता के अनुसार ही चलना होगा अन्यथा यह विनाश की ओर ले जाएगा, क्योंकि गीता सहिष्णुता, सांमजस्य, शांति, जीने की कला को सिखाती है। 
उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष भी अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में राष्ट्रपति को उदघाटन कार्यक्रम में बुलाया गया था, परंतु उदघाटन वाले दिन तमिलनाडु की तत्कालीन मुख्यमंत्री का देहांत हो गया था और राष्ट्रपति को वहां पर जाना पड़ गया था। लेकिन अबकी बार राष्ट्रपति यहां पर आए हैं, आज इच्छा पूरी हो गई है। उन्होंने कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के बारे में बताया कि यह विश्वविद्यालय ए-प्लस श्रेणी में आता है और हरियाणा के गठन के पहले ही इसकी स्थापना हो गई थी। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार कुरू क्षेत्र में वर्ष 1968 में कुरू क्षेत्र विकास बोर्ड का गठन किया गया और वर्ष 1991 से गीता महोत्सव का प्रारंभ हुआ। आज संपूर्ण विश्व में शांति ओर सहिष्णुता नहीं हैं और इसलिए गीता का संदेश जरूरी है। उन्होंने पिछले वर्ष आयोजित किए महोत्सव के बारे में बताया कि पिछले वर्ष देश के सभी जिलों से आए हुए प्रतिनिधि अपने-अपने जिले से मिट्टी लाए थे और उस मिट्टी से श्री कृष्ण की मूर्ति बनाई जाएगी, जिसे मैटल से संरक्षित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि महोत्सव के दौरान गीता के 18 श्लोकों के तर्ज पर 18 हजार बच्चों द्वारा श्लोकों का उच्चारण किया जाएगा और इसी प्रकार, संत सम्मेलन का भी आयोजन किया जाएगा। 
इससे पूर्व, गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि कुरूक्षेत्र की धरा पर गीता का संदेश दिया गया। कुरूक्षेत्र गीता की भूमि है और समूचे भारत का दिव्य अलौकिक उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी विषय ऐसा नहीं हैं जो गीता से न जुड़ा हो। भौतिकवाद में सुविधाएं तो बढी हैं परंतु श्रीमद भागवत गीता का चिंतन भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि गीता प्रबंधन, स्पेस प्रबंधन, जीवन के प्रबंधन में अहम भूमिका निभाती है। शरीर की पुष्टि और मन की भी पुष्टि करती है। उहोंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्मार्ट सिटी बनाने का निर्णय लिया, लेकिन स्मार्ट सिटी तो बने परंतु उनमें रहने वाले नागरिक भी स्मार्ट होने चाहिए और स्मार्ट नागरिक गीता के संदेश से ही बन सकते हैं। 
अमेरिका से आए सतपाल सिंह ने कहा कि गीता एक सार्वभौमिक ग्रंथ हैं और यह सभी प्राणियों के लिए हैं। यह ग्रंथ एक विशेष के लिए नहीं हैं और गीता में हिन्दू और मनुष्य का नाम भी नहीं हैं। गीता जीवन जीने की कला सिखाती है। उन्होंने कहा कि गीता मन को शांत करती हैं और इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने मन को काबू करें। तेरा-मेरा, बडा-छोटा सभी को समाप्त कर दें। 
अमेरिका के वैदिक अध्ययन संस्थान के डेविड फ्राले ने कहा कि गीता जीने की राह देती हैं और कुरूक्षेत्र की भूमि से गीता का संदेश हर किसी को दिया गया है। उन्होंने कहा कि गीता हर युग में सिख देती हैं। इसी प्रकार, गीता कर्म, ज्ञान, भक्ति का भी संदेश देती हैं। उन्होंने कहा कि गीता एक ऐसी पुस्तक हैं जो दुनिया में अपने आप में एक अनोखी और नायाब पुस्तक हैं। 
इस मौके हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल, हरियाणा के शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री डा. बनवारी लाल, विधायक सुभाष सुधा, बखशीश सिंह विर्क, स्वामी परमानंद महाराज, हरियाणा के मुख्य सचिव डी.एस. ढेसी, कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति केसी शर्मा, पंजाब एवं हरियाणा के उच्च न्यायालय के न्यायधीश राजेश बिंदल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

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