चंडीगढ़।  हरियाणा सरकार ने कर्मचारियों के हित में एक बड़ा कदम उठाते हुए अपने सभी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को 30 नवम्बर, 2017 से सीमित कैशलैस चिकित्सा सेवाएं मुहैया करवाने का निर्णय लिया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस सम्बन्ध में नीति अधिसूचित की गई है। 

विभाग के एक प्रवक्ता ने आज यहां यह जानकारी देते हुए बताया कि यह योजना केवल राज्य सरकार के कर्मचारियों तथा पेंशनभोगियों के लिए होगी। नियमित कर्मचारियों व पेंशनभोगियों के पति-पत्नी या आश्रित इस योजना के तहत शामिल  नहीं होंगे। हालांकि, कर्मचारियों तथा पेंशनभोगियों के पति-पत्नी या आश्रित 6 मई, 2005 को जारी प्रतिपूर्ति की मौजूदा नीति के अनुसार उपचार के लिए पात्र होंगे। उन्होंने बताया कि इस सीमित कैशलैस चिकित्सा सुविधा में केवल छ: प्राणघातक स्थितियां नामत: हृदय संबंधी आपात स्थिति, दुर्घटनाएं, कैंसर का तीसरा व चौथा चरण, कोमा, मस्तिष्क आघात तथा इलैक्ट्रोक्यूशन शामिल होंगी। यह योजना प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों व सरकारी सहायता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों, सभी जिला अस्पतालों, राज्य सरकार के अन्य स्वास्थ्य संस्थानों तथा राज्य सरकार के पैनल में शामिल में सभी निजी अस्पतालों में लागू होगी। 
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के सभी विभागों द्वारा अपने नियमित कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को वैध पहचान पत्र जारी किए जाएंगे ताकि वे सीमित कैशलैस चिकित्सा सेवाओं का लाभ उठाने में सक्षम हो सकें। पेंशनभोगियों को पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ) ले जाना होगा। ये पहचान पत्र सभी सरकारी व पैनल में शामिल निजी स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा उन्हें सीमित कैशलैस चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए पहचान के प्रमाण के तौर पर स्वीकार किए जाएंगे। विभागों को उनके पहचान पत्रों को आधार नम्बरों के साथ जोडऩा होगा। 
प्रवक्ता ने बताया कि नियमित कर्मचारी या पेंशनभोगी के तौर पर अपनी पहचान स्पष्टï करने के लिए अस्पतालों में वैध पहचान पत्र व पीपीओ नम्बर प्रस्तुत करना लाभार्थी की जिम्मेवारी होगी। इसी प्रकार, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से पहचान पत्र व पीपीओ के लिए कहना और उन्हें यह बताना कि उसकी स्थिति या सर्जरी या प्रक्रिया या बीमारी कैशलैस चिकित्सा सुविधा के तहत आती है या नहीं, स्वास्थ्य संस्थानों की जिम्मेवारी होगी। 
उन्होंने बताया कि वित्त विभाग और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (एनआईसी) एचआरएमएस डाटा से कर्मचारियों की पहचान के लिए डाटा उपलब्ध करवाएंगे और यह डाटा स्वास्थ्य विभाग को भेजा जाएगा जो इसे अपनी अधिकारिक वैबसाइट पर अपलोड करेगा। पीपीओ नम्बरों के साथ पेंशनभोगियों का डाटाबेस वित्त विभाग और एनआईसी द्वारा स्वास्थ्य विभाग को भी उपलब्ध करवाया जाएगा और इसे भी स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक वैबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। यदि अस्पताल लाभार्थी की पात्रता सत्यापित करना चाहते हैं तो इसे स्वास्थ्य विभाग की वैबसाइट पर काउंटर चैक करके सत्यापित किया जा सकता है। 
उन्होंने बताया कि सीमित कैशलैस उपचार के लिए 5 लाख रुपये की सीमा निर्धारित की गई है। यदि उपचार की लागत इस राशि से अधिक हो जाती है तो बढ़ी हुई राशि का भुगतान कर्मचारी या पेंशनभोगी द्वारा किया जाएगा। बाद में, पात्रता तथा मौजूदा प्रतिपूर्ति नीति के अनुसार संबंधित विभाग से इस राशि की प्रतिपूर्ति करवाई जा सकती है। यदि प्रत्यारोपण या डिवाइस की कीमत राज्य सरकार द्वारा निर्धारित की गई है तो इसे केवल कैशलैस पद्धति से ही दिया जाएगा। केन्द्र सरकार द्वारा 2017 में कार्डियक स्टंट तथा घुटने प्रत्यारोपण की दरें अधिसूचित की गई हैं और राज्य सरकार की बजाय यही दरें होंगी। जिस प्रत्यारोपण या डिवाइस की दरें केन्द्र या राज्य सरकार द्वारा निर्धारित नहीं की गई हैं, उनके लिए कर्मचारियों तथा पेंशनभोगियों को भुगतान करना होगा और बाद में मौजूदा प्रतिपूर्ति नीति के अनुसार इसकी प्रतिपूर्ति करवाई जा सकती है। जो  बीमारियां पैरा 2 (॥) के तहत कवर नहीं होती, उनके लिए भी अस्पताल को कर्मचारियों तथा पेंशनभोगियों द्वारा भुगतान किया जाएगा और बाद में मौजूदा प्रतिपूर्ति नीति के अनुसार संबंधित विभाग से इसकी प्रतिपूर्ति करवाई जा सकती है। 
प्रवक्ता ने बताया कि कैशलैस स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध करवाने के लिए अस्पतालों द्वारा प्रस्तुत किए गए सभी चिकित्सा बिलों का भुगतान या निपटान बिल प्राप्ति के 60 दिनों के भीतर सुनिश्चित करवाने की जिम्मेदारी संबंधित विभागाध्यक्ष या कार्यालय प्रमुख की होगी। अस्पतालों द्वारा दी गई कैशलैस सेवा के लिए कैशलैस चिकित्सा बिलों का निपटान संबंधित विभाग के मुखिया के कार्यालय में किया जाएगा और अस्पताल को समय पर भुगतान किया जाएगा। भुगतान में किसी प्रकार के विलम्ब से बचने के लिए बिल बनाने तथा राशि के हस्तांतरण तथा शिकायत इत्यादि के लिए नोडल अधिकारी जिम्मेदार होंगे। 
उन्होंने बताया कि सभी सरकारी तथा पैनल में शामिल निजी स्वास्थ्य संस्थान तथा सभी सरकारी विभाग इस कार्य के लिए खासतौर एक प्रकोष्ठï के साथ अपने-अपने नोडल अधिकारी नियुक्त करेंगे और अपनी आधिकारिक वैबसाइट पर उनके संपर्क विवरण डालने के साथ-साथ इन्हें स्वास्थ्य विभाग को भी ई-मेल करेंगे। स्वास्थ्य विभाग एक नया पेज सृजित करेगा और सभी विभागों के नोडल अधिकारियों,  मेडिकल कॉलेजों, पैनल में शामिल निजी अस्पतालों का विवरण अपनी वैबसाइट पर डालेगा। 
उन्होंने बताया कि ये सेवाएं कैशलैस पद्धति पर पीपीपी मोड पर उपलब्ध करवाई जाएंगी और राज्य सरकार के कर्मचारियों और लाभार्थियों के लिए नि:शुल्क रहेंगी। इन सेवाओं में कैथलैब सेवाएं भी शामिल होंगी। इसका खर्च मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना (एमएमआईवाई) के तहत फिट चार्ज होगा। सरकारी मेडिकल कॉलेजों तथा सरकारी सहायता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों द्वारा इन छ: श्रेणियों की बीमारियों में राज्य सरकार के नियमित कर्मचारियों तथा पेंशनभोगियों को कैशलैस सेवाएं उपलब्ध करवाने पर हुआ खर्च मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना के तहत फिट चार्ज होगा।
प्रवक्ता ने बताया कि अंग प्रत्यारोपण जैसे किसी पैकेज, प्रक्रिया या सर्जरी की दरों तथा डिवाइस व प्रत्यारोपण के  संबंध में सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों और पैनल में शामिल निजी अस्पतालों के लिए राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर तय की गई दरें लागू होंगी। ये दरें स्वास्थ्य विभाग की वैबसाइट पर दर्शाई जाएंगी। उन्होंने बताया कि यदि कोई झूठा बिल या दावे की डुप्लीकेसी सामने आती है तो उस लाभार्थी या संस्थान के विरूद्ध हरियाणा सिविल सेवाएं ( दंड एवं अपील) नियमों के तहत बड़ा जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि गलत बिल या झूठा उपचार सामने आता है और इसकी पुष्टिï हो जाती है तो उस अस्पताल को पैनल से बाहर किया जा सकता है और स्वास्थ्य विभाग को केस भेजने की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी। इसके अलावा, स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष तौर पर एक प्रकोष्ठï स्थापित किया जाएगा जो इस योजना के तहत सभी पहलुओं की निगरानी करेगा। 
पैनल में शामिल निजी अस्पतालों का उल्लेख करते हुए प्रवक्ता ने बताया कि ऐसे अस्पताल राज्य सरकार की निर्धारित पैकेज दरों के तहत दिए गए उपचार के लिए शत-प्रतिशत कैशलैस सेवाएं देंगे। यदि किसी लाभार्थी का उपचार किसी ऐसी स्थिति के लिए किया जाता है जो कि निर्धारित पैकेज के तहत नहीं आती तो पीजीआई दरों जमा शेष राशि के 75 प्रतिशत पर पैनल में शामिल अस्पताल 80 प्रतिशत उपचार कैशलेस करेंगे तथा अंतिम बिल की 20 प्रतिशत राशि का भुगतान लाभार्थी द्वारा किया जाएगा जिसे बाद में लाभार्थी द्वारा उसकी पात्रता के अनुसार मौजूदा पॉलिसी के तहत प्रतिपूर्ति के लिए संबंधित विभाग को भेजा जा सकता है। उन्होंने बताया कि केवल पीजीआई दरों पर पैनल में शामिल अस्पताल 50 प्रतिशत उपचार कैशलैस करेंगे और अंतिम बिल की 50 प्रतिशत राशि का भुगतान लाभार्थी द्वारा किया जाएगा जिसे बाद में लाभार्थी द्वारा उसकी पात्रता के अनुसार मौजूदा पॉलिसी के तहत प्रतिपूर्ति के लिए संबंधित विभाग को भेजा जा सकता है।
उन्होंने बताया कि पॉली ट्रामा इत्यादि के मामलों में, जहां उसी सीटिंग या ऑपरेटिव प्रक्रिया में दिए गए उपचार के लिए कई पैकेज शामिल हैं, ऐसे मामलों में पैनल में शामिल  निजी अस्पतालों द्वारा क्लेम की गई प्रतिपूर्ति एक फार्मूले के अनुसार होगी जिसके अनुसार उच्चतम लागत पैकेज की प्रतिपूर्ति पैकेज लागत की शत-प्रतिशत की दर से की जाएगी। द्वितीय उच्चतम लागत पैकेज की प्रतिपूर्ति पैकेज लागत की 50 प्रतिशत की दर से तथा तृतीय उच्चतम लागत पैकेज की प्रतिपूर्ति पैकेज लागत की 25 प्रतिशत की दर से की जाएगी। बाद के अन्य सभी लागत पैकेज की प्रतिपूर्ति पैकेज लागत की 25 प्रतिशत की दर से की जाएगी। 
          प्रवक्ता ने बताया कि ओपीडी में फॉओअप सेवाएं कैशलेस नहीं हैं। हालांकि, इसी तरह की प्राण घातक स्थिति की दूसरी घटना हो जाती है तो यह फिर से कैशलेस सेवाओं के लिए पात्र होगी। उन्होंने बताया कि अस्पताल द्वारा प्रत्येक बिल की दो प्रतियां सृजित की जाएंगी जिनमें से एक संबंधित विभाग के लिए जबकि दूसरी रोगी के लिए होगी। अस्पताल द्वारा डिस्चार्ज सारांश (समरी) के साथ मूल बिल डिस्चार्ज के सात दिन के भीतर कूरियर या स्पीड पोस्ट के माध्यम से संबंधित विभाग के नोडल अधिकारी को भेजा जाएगा और बिल की एक प्रति डिस्चार्ज के समय लाभार्थी को भी दी जाएगी। यह अस्पताल द्वारा रखी गई कार्यालय प्रति के अतिरिक्त होगी। उपचार पूरा होने के बाद लाभार्थी को अस्पताल द्वारा बनाए गए अंतिम बिल पर प्रति हस्ताक्षर करने होंगे।
          उन्होंने बताया कि सभी सूचीबद्ध अस्पतालों को भुगतान के इलेक्ट्रॉनिक हस्तांतरण के लिए विभाग के नोडल अधिकारी को बिल के साथ अपना बैंक विवरण अर्थात बैंक का नाम, खाता संख्या, आईएफएससी कोड, एमआईसीआर कोड और पैन नंबर देना होगा।

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