नई दिल्ली। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने राफेल लड़ाकू विमान की खरीद संबंधी सौदे से जुड़े आरोपों को ‘‘शर्मनाक’’ करार दते हुए आज कहा कि इस तरह के आरोप सशस्त्र बलों के लिए नुकसानदेह हैं।


रक्षा मंत्री की टिप्पणी कांग्रेस के कल के आरोप के बाद आई है। कांग्रेस ने कल आरोप लगाया था कि एक कारोबारी को फायदा पहुंचाने के लिये प्रधानमंत्री ने ‘‘समूचा सौदा’’ ही बदल दिया। सीतारमण ने कहा कि शस्त्र प्रणाली के साथ हर विमान की कीमत संप्रग सरकार के समय जिस कीमत पर बात हुई थी उससे कहीं कम है।
उन्होंने आरोप लगाया कि लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर संप्रग सरकार के अनिर्णय की वजह से राष्ट्रीय सुरक्षा से ‘संभवत: समझौता’ हुआ है।
सीतारमण ने संवाददाताओं को बताया, ‘‘यह आरोप शर्मनाक हैं…इस सौदे को पारदर्शी प्रक्रिया का पालन करते हुये अंतिम रूप दिया गया।’’ रक्षा मंत्री ने कहा कि इस सौदे को लेकर कलह सशस्त्र बलों के लिए नुकसानदायक होगी। उन्होंने कहा कि वायुसेना की फौरी जरूरत ही इस करार को करने की अहम वजह थी।
उन्होंने कहा कि 36 राफेल विमानों के लिये अंतिम करार पर सितंबर 2016 में दस्तखत किये गये। इससे पहले भारत और फ्रांस के बीच पांच दौर की लंबी चर्चा हुई और इसे सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने भी मंजूरी दी थी।
रक्षा मंत्री ने कहा कि संप्रग सरकार विमान खरीदने के प्रस्ताव पर 10 साल तक चुप्पी साधे बैठी रही।
भाजपा नेता पीयूष गोयल ने कहा कि राफेल सौदे को लेकर कांग्रेस के आरोप यह दिखाते हैं कि विपक्षी पार्टी ‘परेशान’ है।
गोयल ने संवाददाताओं से कहा कि राफेल सौदा भारत और फ्रांस के बीच सरकारों के स्तर पर बातचीत के बाद हुआ है। यह भारतीय वायुसेना की तत्काल जरूरत पूरा करने के लिए किया गया।
उन्होंने कहा कि विमान की जरूरत के कारण वायुसेना की क्षमता के साथ समझौता हुआ।
भाजपा नेता ने कहा कि आरोप कांग्रेस पार्टी की परेशानी को दिखाता है।

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