भारतीय रेल ने 48 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को सुपरफास्ट श्रेणी में अपग्रेड कर दिया है। रेलवे ने सुपरफास्ट ट्रेनों पर नई लेवी भी लगा दी है।  

भारतीय रेल ने 48 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों का किराया बढ़ा दिया है। इन ट्रेनों को अब “सुपरफास्ट” श्रेणी  में अपग्रेड कर दिया गया है। एक नवंबर को जारी रेलवे की नई समय सारिणी के अनुसार इन ट्रेनों की औसत गति 50 किलोमीटर प्रति घंटा से पांच किलोमीटर प्रति घंटा और बढ़ा दी गयी है। हालांकि समय सारिणी में ट्रेनों के निर्धारित समय से पहुंचने के बारे में कुछ नहीं कहा गया है। इसके अलावा भारतीय रेल अब यात्रियों से “सुपरफास्ट लेवी” वसूलेगा। हर साल सर्दियों में कोहरे के कारण ट्रेनें कई-कई घंटे देरी से चलती हैं ऐसे में ठंड आने से ठीक पहले यात्रियों से ज्यादा रफ्तार के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूलने के रेलवे के इस कदम की आलोचना हो रही है।
भारतीय रेल ने सुपरफास्ट ट्रेनों की सुविधा में कोई बढ़ोतरी नहीं की है लेकिन अब यात्रियों को हर टिकट पर 30 रुपये (स्लीपर), 45 रुपये (सेकेंड और थर्ड एसी) और 75 रुपये (फर्स्ट एसी) अतिरिक्त देने पड़ेंगे। इस लेवी से रेलवे को 70 करोड़ रुपये अतिरिक्त आय होने का अनुमान है। इस श्रेणी में शामिल की गयी 48 नई ट्रेनों समेत अब कुल 1072 ट्रेनें सुपरफास्ट श्रेणी में हो गयी हैं। भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) ने पिछले साल अपनी रिपोर्ट में सुपरफास्ट ट्रेनों पर प्रतिकूल टिप्पणी की थी। कैग ने अपनी रिपोर्ट में पाया था कि जो ट्रेनें निर्धारित स्पीड से नहीं चलतीं उनमें भी सुपरफास्ट के नाम पर अतिरिक्त किराया वसूला जाता है। कैग ने कहा था कि रेलवे बोर्ड के नियमावली के अनुसार सुपरफास्ट सेवा नहीं देने वाली ट्रेनों के यात्रियों को लिया गया अतिरिक्त किराया वापस मिलना चाहिए।
भारतीय रेल पिछले तीन सालों में लगातार दुर्घटनाओं के कारण खबरों में रही है। रेल मंत्रालय पर भारत की जीवनरेखा कही जाने वाली रेल का किराया बढ़ाने का आरोप लगता रहा है। पूर्व रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने किराये की फ्लेक्सी फेयर नीति लागू की थी जिसका काफी विरोध हुआ था। फ्लेक्सी फेयर में किराया इस बात से निर्धारित होता है कि आपने ट्रेन के प्रस्थान से कितना पहले टिकट आरक्षित कराया है। सितंबर 2017 में नरेद्र मोदी कैबिनेट के तीसरे विस्तार में आलोचनाओं से घिरे सुरेश प्रभु की जगह पीयूष गोयल का रेल मंत्री बनाया गया।

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