​हिमाचल में ऊपरी पहाड़ियों पर बर्फ गिरनी शुरू हो गई है जिसकी ठंडक निचले हिमाचल तक पहुंच तो रही है पर चुनावों की उष्णता ने इस ठंडक को पिघला ऐसी गर्मी पैदा कर दी है कि 26 साल से लेकर 86 साल तक के उम्मीदवार बिना रुके खुद को और पार्टी की नैया को बचाने में जी जान से जुटे हैं।

   हिमाचल में ऊपरी पहाड़ियों पर बर्फ गिरनी शुरू हो गई है जिसकी ठंडक निचले हिमाचल तक पहुंच तो रही है पर चुनावों की उष्णता ने इस ठंडक को पिघला ऐसी गर्मी पैदा कर दी है कि 26 साल से लेकर 86 साल तक के उम्मीदवार बिना रुके खुद को और पार्टी की नैया को बचाने में जी जान से जुटे हैं। खुद को महान और विरोधियों को नीचा दिखाने के दंगल में कई पलटियां लगने से कई ‘अपने’ भी घायल हो रहे हैं पर जीतने को बेताब दोनों दल कांग्रेस और भाजपा इसके लिए कुछ भी दांव पर लगाने को तैयार हैं। चाहे वह नीतिगत मामला हो या कई बरसों का साथ हो। बेशक अपनों को छोड़ना पड़े या फिर परायों को गले लगाना पड़े, लेकिन वे कहते हैं चुनावी राजनीति में सब जायज है। 

  कांग्रेस ने तो पहले से ही वीरभद्र सिंह को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया था, पर भाजपा में अभी तक मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित न करने से कार्यकर्ता अनमने मन से मिशन 50 प्लस के नारे से प्रचार अभियान को आगे बढ़ा रहे थे। इस स्थिति को भांपते हुए भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह ने आज राजगढ़ में घोषणा कर दी कि प्रेमकुमार धूमल प्रदेश के मुख्यमंत्री पद के लिए भाजपा का चेहरा होंगे। इससे कार्यकर्ताओं में जोश है। द्रंग में गुरु-शिष्य कौल सिंह ठाकुर और पूर्णचंद ठाकुर आमने सामने हैं तो सुजानपुर में कभी राजनीति में उंगली पकड़ कर लाने वाले अपने शिष्य राजेंद्र राणा के सामने खुद प्रेमकुमार धूमल खड़े हैं। द्रंग में तो कौल सिंह को भाजपा के जवाहर ठाकुर से ज्यादा खतरा पूर्णचंद ठाकुर से लग रहा है।

प्रदेश में छह सीटों पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। इन प दोनों दलों के दिग्गज किस्मत आजमा रहे हैं। वीरभद्र सिंह ने इस बार अपनी शिमला (ग्रामीण) सीट पुत्र को उपहार में दे खुद पहले ठियोग तो बाद में अर्की में ताल ठोंक दी। दलील दी जा रही है कि अर्की से लगातार हार रही कांग्रेस को जीवनदान देना ही नहीं बल्कि इस बार रेकार्ड वोटों से जिताना है। पिछले कई सालों से उपेक्षित पड़े इस हलके को अचानक मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को देख हैरानी भी है और गुस्सा भी। क्षेत्र में लगे सीमेंट प्लांट से प्रदूषण के कारण लोगों का स्वास्थ्य भी बिगड़ रहा है। क्षेत्र के लोगों ने इस समस्या को कई दफा उठाया पर बात नहीं बनी। लिहाजा इस बार क्षेत्र के 15 गांवों ने चुनाव के बहिष्कार का एलान किया है। ऐसे में मुख्यमंत्री को जीत के प्रति आश्वस्त होने के लिए राजनीतिक पैंतरों के अलावा जनता की इन समस्याओं का भी कोई तोड़ सोचना होगा।
सुजानपुर सीट बेशक भाजपा उम्मीदवार के प्रेमकुमार धूमल के लिए नई है पर भावी मुख्यमंत्री को अपने हलके में देख लोग खुश नजर आ रहे हैं। वैसे भी यह इलाका भाजपा का गढ़ रहा है। कांग्रेस उम्मीदवार अपने पुराने शिष्य राजेंद्र राणा को वैसे भी अपने बराबर का उम्मीदवार नहीं मानते। वैसे भी भाजपा ने राजेंद्र राणा की मजबूती को देखते हुए ही धूमल को यहां से उतारा है और संभावित उम्मीदवार नरेंद्र ठाकुर को हमीरपुर से मैदान में उतारा है ताकि दोनों हलकों में जीत पक्की हो सके।
ठियोग हलका कांग्रेस की बुजुर्ग नेता विद्या स्टोक्स का गढ़ रहा है पर इस बार उनके साथ खुला खेल हो गया। अपनी उम्र और स्वास्थ्य का हवाला दे स्टोक्स ने इस बार अपना हलका मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के लिए छोड़ दिया था। वीरभद्र ने यहां से चुनाव लड़ने की घोषणा भी कर दी पर फिर चुपके से अर्की से परचा भर दिया। इधर स्टोक्स ने वहां से विजयपाल खाची को मैदान में उतारने की बात कही। बताते हैं कि इस पर आलाकमान राजी भी हुआ पर फिर अचानक दीपक राठौर के नाम की घोषणा कर दी गई। इसके साथ ही यहां से माकपा के उम्मीदवार राकेश सिंघा और भाजपा के राकेश वर्मा में सीधे मुकाबले की संभावना बन गई है।
शिमला ग्रामीण हलके से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पूरे प्रचार के दौरान गायब रह कर भी जीतते रहे हैं। शायद इसीलिए इस बार उन्होंने अपना यह प्यारा हलका पुत्र विक्रमादित्य को सौंप दिया है। विक्रमादित्य के मुकाबले में भाजपा ने वीरभद्र सिंह के ही चहेते रहे प्रमोद शर्मा को उतार कर मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। शर्मा विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रह चुके हैं।

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