इन छात्रों ने इस चैंपियनशिप को जीतने के लिए कड़ी मेहनत की और अपना लक्ष्य हासिल किया।

  गुडगांव की अंडर 14 योगा टीम के छह खिलाड़ियों को रेवाड़ी में आयोजित स्टेट लेवल स्कूल चैंपियनशिप के दौरान पूरा दिन में एक आलू पराठा खाने को दिया गया और रात में वे जमीन पर ही सोए। इस प्रतियोगिता के बाद का छात्रों का अनुभव बताता है कि किस तरह प्रशासन अपने ही अभियान को आगे बढ़ाने को लेकर सीरियस नहीं है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार केंद्र की बीजेपी सरकार भले ही अंतरराष्ट्रीय लेवल पर योग को प्रमोट करती रही है लेकिन राज्य की बीजेपी की ही सरकार के पास इतना पैसा नहीं है कि वह इन खिलाड़ियों के रहने और खाने का सही तरीके से इंतजाम कर सके।

एक आरटीआई की रिपोर्ट के अनुसार साल 2015 और 2016 में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर सरकार ने 34.5 करोड़ रुपए खर्चा किया था। वहीं इस पर हरियाणा सरकार ने भी लाखों रुपए खर्च किए थे। हरियाणा के इन छात्रों ने इस चैंपियनशिप को जीतने के लिए कड़ी मेहनत की और अपना लक्ष्य हासिल किया। उन्होंने बहुत ही मुश्किल आसन, बज्रासन और धनुरासन किए। इन छह छात्रों में से अब तीन छात्रों को राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया है। इसकी पुष्टि इन छात्रों की योगा ट्रेनर पूनम बिमरा ने की। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार बिमरा ने असिटेंट अजीत सोलंकी ने कहा कि इन छात्रों को बेसिक सुविधा न मिल पाने के कारण काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।
इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले कई छात्रों का आरोप है कि उन्हें इवेंट में पूर्ण रुप से अच्छा खाना नहीं दिया गया। वहीं जिस स्कूल के ये छात्र हैं, उस स्कूल प्रशासन ने खुद पर लगे सभी आरोपों को खारिज किया है। स्कूल की प्रिंसिपल सुमन शर्मा ने कहा कि इस प्रतियोगिता में हमारे स्कूल के भी चार छात्रों ने भाग लिया था। शर्मा ने दावा किया कि हमने सभी छात्रों को परांठा, ड्राई फ्रूट और सेब दिए। अगर कोई कहता है कि उसे ये सब नहीं मिला है तो वह झूठ बोल रहा है।

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