खेती-बाड़ी में अव्वल कहे जाने वाले हरियाणा में किसानों की स्थिति की दूसरी ही तस्वीर सामने आयी है। यहां 6 लाख से अधिक किसानों पर सहकारी या अन्य बैंकों का कर्ज है। महज 1761 ऐसे किसान हैं, जिन पर कोई देनदारी नहीं है। फसल उत्पादन में नंबर वन कहे जाने वाले हिसार, सिरसा व फतेहाबाद के किसानों की स्थिति कर्ज के मामले में टॉप-थ्री पर है।

धान का कटोरा कहे जाने वाले जीटी रोड के किसानों पर भी कर्ज की मार है। प्रधानमंत्री फसल बीमा के तहत चल रहे काम के दौरान किसानों की स्थिति सामने आयी। असल में जिन किसानों पर कर्ज है, उनके लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में आना अनिवार्य है। जिन पर कर्ज नहीं है, उनके लिए योजना वैकल्पिक है। वे चाहें तो बीमा योजना का कवर लें, चाहे तो नहीं। इस साल की खरीफ फसल के दौरान किसानों ने फसल बीमा के लिए 122 करोड़ 88 लाख रुपए प्रीमियम जमा कराया। सरकार योजना को ऐतिहासिक बता रही है, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि किसानों की मर्जी के बगैर उनके बैंक खातों से प्रीमियम राशि काटी जा रही है। हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र में भी विपक्ष ने इस योजना पर सवाल उठाए। गोहाना से विधायक जगबीर सिंह मलिक के सवाल पर ही कर्जदार किसानों का यह आंकड़ा सामने आया।

हरियाणा में 6 लाख से अधिक किसानों पर लोन 

बड़ी संख्या है कर्जदारों की

बीमा योजना के तहत प्रदेश को तीन जोन में बांटा गया है। जोन-1 में सिरसा के 63787, भिवानी के 41089, फरीदाबाद 3142, कुरुक्षेत्र 25489, कैथल 38897, पंचकूला 5400 तथा रेवाड़ी के 23054 किसानों पर ऋण है। जोन-2 में हिसार के 63800, सोनीपत 32360, गुरुग्राम 2560, करनाल 56880, अंबाला 24840, जींद 51560 तथा महेंद्रगढ़ के 3240 किसान कर्जदार हैं। जोन-3 में फतेहाबाद के 60640, रोहतक 20400, झज्जर 15160, मेवात 2720, पलवल 14400, पानीपत 19200 तथा यमुनानगर के 32240 किसानों पर कर्ज है।

बस इतने ही हैं मुक्त

जो किसान कर्ज से मुक्त हैं उनमें भिवानी के 187, हिसार के 239, सोनीपत के 121, करनाल 213, जींद 193, फतेहाबाद 227 तथा यमुनानगर के 121 किसान शामिल हैं। कुरुक्षेत्र व कैथल में एक भी किसान ऐसा नहीं है, जिस पर ऋण न हो।

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