प्रोफेसर गोंड ने कहा कि उस हादसे से मैं आज तक नहीं उबर सकी हूं।

सारा हाफिज़
बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) की छात्रा द्वारा कथित यौन शोषण के आरोपों और विरोध-प्रदर्शन के बाद भड़की हिंसा को काबू में करने के लिए पिछले शनिवार (23 सितंबर) की रात पुलिस ने ना केवल छात्राओं पर बेरहमी से लाठीचार्ज किया बल्कि महिला शिक्षक को भी नहीं छोड़ा। इंडियन एक्सप्रेस से अपना दर्द साझा करने वाली महिला महाविद्यालय की समाजशास्त्र की असिस्टेन्ट प्रोफेसर डॉ. प्रतिमा गोंड ने कहा कि जब वो पुलिस के लाठीचार्ज से एक छात्रा को बचाने की कोशिश कर रही थीं, तब उन्हें पुलिसकर्मियों ने बेइज्जत किया और उन पर लाठियां भी बरसाईं।
डॉ. गोंड ने बताया, “जब पुलिस लाठीचार्ज कर रही थी, तभी भीड़ में एक छात्रा गिर गई। यह देखकर मैं उसे बचाने, उस छात्रा के पास पहुंच गई लेकिन मैं भी उनके लाठीचार्ज की शिकार हो गई। इस दौरान में उससे गुजारिश करती रही कि मुझे मत मारो, मैं यूनिवर्सिटी प्रोफेसर हूं लेकिन उनलोगों ने मेरी एक नहीं सुनी और मुझे भी पीटते रहे।” प्रोफेसर गोंड ने कहा कि उस हादसे से मैं आज तक नहीं उबर सकी हूं।

प्रोफेसर गोंड ने कहा, “उनलोगों ने मेरे सिर पर दो-तीन लाठियां मारीं; इससे मेरी उंगलियों में चोट लग गई। मैं अपराधी नहीं हूं, मैं शिक्षक हूं। हम किसी भी हिंसा को उकसा नहीं रहे थे। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक शिक्षक और स्टूडेन्ट्स को पीटा गया और वह भी तब जब एक भी महिला अधिकारी वहां मौजूद नहीं थी। यह घटना भी देर रात लगभग 11.30 बजे हुई।”
बीएचयू में शनिवार की रात को कथित तौर पर पुलिस द्वारा बल प्रयोग और लाठीचार्ज में कई छात्र-छात्राओं समेत दो पत्रकार भी घायल हो गए थे। ये लोग कथित तौर पर एक छात्रा के यौन शोषण के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे जो हिंसक हो गया था। इस घटना के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करने वाले छात्र कुलपति से मिलना चाहते थे लेकिन उन्हें रोके जाने के बाद छात्र उग्र हो गए थे और देखते ही देखते भीड़ हिंसक हो उठी। बाद में प्रशासन को इस घटना की जांच के आदेश दिए गए।

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