प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो अक्टूबर 2016 को 1200 करोड़ रुपये के बजट के साथ प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना शुरू की थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना “प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना” (पीएमकेवीआवाई) अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए संघर्ष कर रही है। जुलाई 2017 के पहले हफ्ते तक के आंकड़ों के अनुसार इस योजना के तहत जिन 30.67 लाख लोगों को कौशल प्रशिक्षण दिया गया था उनमें से 2.9 लाख लोगों को ही नौकरी के प्रस्ताव मिले। यानी योजना के तहत प्रशिक्षण पाने वालों में 10 प्रतिशत से भी कम को नौकरी हासिल हो सकी। सूत्रों के अनुसार योजना के इच्छित परिणाम न देने को भापंते हुए केंद्र सरकार अब इसे जिला स्तर पर कम समय में लोगों को प्रशिक्षण करके स्थानीय स्तर पर रोजगार दिलाने पर ध्यान दे रही है। पिछले वित्त वर्ष तक कौशल विकास के तहत प्रशिक्षण देने वालों को नौकरी पाने वालें से जुड़े आंकड़े नहीं देने होते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो अक्टूबर 2016 को 1200 करोड़ रुपये के बजट के साथ कौशल विकास योजना शुरू की थी।

सूत्रों के अनुसार कौशल विकास के तहत युवाओं को बहुत कम रोजगार मिलने की बात सरकार समझ चुकी है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि अब इस योजना में राज्य की पहले से ज्यादा भागीदारी पर जोर दिया जाएगा। जिलाधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। उनका काम जिला स्तर पर कौश विकास प्रशिक्षण दिलाना और उसकी निगरानी करना होगा। अधिकारियों के अनुसार कौशल विकास के तहत मिलने वाले प्रशिक्षण की गुणवत्ता कई बार बाजार की जरूरत के अनुरूप नहीं होती।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना भारत के सभी सवालों का जवाब नहीं है। आप थोड़े समय में गुणवत्ता और लोकेशन जैसी चीजें सुनिश्चित नहीं कर सकते। हम इसमें बदलाव करके जिला स्तरीय कार्ययोजना बनाकर इसे ज्यादा प्रभावी बनाएंगे। तीन महीने में जिला स्तरीय कौशल विकास कार्ययोजना तैयार हो जाएगी। पहले 100 जिलों में ये लागू होगी और राज्य सरकार और जिला प्रशासन को पैसा दे दिया जाएगा। उसके बाद सरकार समझौता पत्र (एमओयू) तैयार करके जिला स्तरीय कार्ययोजना पर निगरानी रखेगी।”
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि जिला स्तीरय कार्ययोजना के लिए स्थानीय बाजार की जरूरतों का अध्ययन किया जा रहा है। अधिकारी ने कहा कि सरकार ये पता करेगी कि किस तरह के कुशल कामगार की कहां पर जरूरत है और उसके लिए कितने वेतन तक दूसरे स्थान पर काम करना संभव होगा। मसलन, एक प्लंबर पांच हजार रुपये की नौकरी के लिए शायद ओडिशा न जाए लेकिन अगर 15 हजार रुपये की नौकरी मिले तो वो जाने की सोच सकता है।
नरेंद्र मोदी सरकार ने साल 2014 में कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय का गठन किया था। राजीप प्रताप रूडी को मोदी मंत्रिमंडल से हटाए जाने के बाद इस महीने की शुरुआत में मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को दिया गया है। राजीव प्रताप रूडी के अनुसार मंत्रालय का काम नौकरी दिलाना नहीं था बल्कि लोगों को नौकरी लायक बनाना था।

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