निवार को कोर्ट ने साल 2008 की सड़क दुर्घटना में फैसला सुनाते हुए हरियाणा एक उद्योगपति के बेटे को महज दो साल की सजा सुनाई।

दिल्ली की एक अदालत ने सड़क हादसों में मौत के मामले में सजा बढ़ाने को लेकर शनिवार (15 जुलाई, 2017) को एक अनूठी तुलना करते हुए कहा कि लापरवाह ड्राइवरों को अधिकतम दो साल की सजा होती है, जबकि गोहत्या करने वालों को पांच से 14 साल तक की सजा होती है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजीव कुमार ने आगे कहा कि गाय को मारने के लिए सजा 5, 7 और 14 साल की है। मगर तेज वाहन चलाने और लापरवाही से वाहन चलाने के कारण होने वाली मौतों को लेकर कानून में सिर्फ दो साल की सजा का प्रावधान है। बता दें कि शनिवार को कोर्ट ने साल 2008 की सड़क दुर्घटना में फैसला सुनाते हुए हरियाणा के एक उद्योगपति के बेटे को महज दो साल की सजा सुनाई। इस दौरान कोर्ट ने आरोपी उत्सव भसिन को पीड़ित पारिवार को दस लाख रुपए मुआवजा और घायल परिवार को दो लाख रुपए का मुआवजा देने का भी फैसला सुनाया। कोर्ट ने सड़क हादसे से जुड़े कानून में बदलाव के लिए कार्यपालिका से भी हस्तक्षेप की मांग की है। जानकारी के लिए बता दें कि साल साल 2008 में 11 सितंबर को अनुज भसिन ने अपनी बीएमडब्ल्यू कार से अनुज चौहान और उनके दोस्त को टक्कर मार दी। घटना दक्षिणी दिल्ली के मूलचंद की है जहां चौहान की हॉस्पिटल ले जाते वक्त मौत हो गई। जबकि उनके दोस्त को गंभीर चोटें आईं। तब पुलिस ने आरोपी अनुज को दिल्ली के आईएसबीटी कश्मीरी गेट बस अड्डे से गिरफ्तार किया था जो चंडीगढ़ भागने की कोशिश कर रहा था।

अदालत ने आगे कहा कि इस फैसले की एक कॉपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जरूर भेजी जानी चाहिए। जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 304-ए के तहत ऐसे अपराधियों के खिलाफ सजा को बढ़ाने की मांग की जाए। इस दौरान कोर्ट ने फिल्म जिंदगी और तूफान के एक गाने के बोल, आदमी चाहे तो तकदीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा किया है, का हवाला दिया। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि भारत में होने वाली सड़क दुर्घटना के आश्चर्यजनक आंकड़े बताते हुए कहा कि अकेले भारत में साल 2015 के आंकड़े के अनुसार 4.64 लाख सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं।

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