पहले चरण में आय कर के राडार पर कुल 17.92 लाख लोग आए थे जिन्होंने भारी मात्रा में कैश डिपॉजिट कराए थे लेकिन उनके टैक्स प्रोफाइल से डाटा मेल नहीं खा रहे थे।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने दूसरे फेज में ऐसे पांच लाख 56 हजार लोगों की पहचान की है जिन्होंने नोटबंदी के दौरान भारी मात्रा में कैश जमा कराया था। अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट उनके खातों की जांच कर रहा है और कर चोरी का पता करने में जुटा है। ऑपरेशन ‘क्लीन मनी’ के तहत जुटाई गई जानकारी में पता चला है कि इन लोगों ने अपने टैक्स प्रोफाइल में नोटबंदी के दौरान जमा की गई रकम का कोई उल्लेख नहीं किया है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक पहले चरण के तहत 1.04 लाख लोगों ने भी सभी बैंक खातों का ई-वेरिफिकेशन नहीं कराया था।

आयकर विभाग ऐसे लोगों के ऊपर हाई कैश डिपॉजिट करने पर ऑपरेशन क्लीन मनी के दूसरे फेज के तहत नया केस कर सकती है। ऑपरेशन क्लीन मनी की शुरुआत इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 31 जनवरी, 2017 को की थी। इसके तहत नोटबंदी के दौरान भारी कैश जमा करने वालों को अपने सभी बैंक खातों का ई-वेरिफिकेशन कराना था।
बता दें कि पहले चरण में आय कर के राडार पर कुल 17.92 लाख लोग आए थे जिन्होंने भारी मात्रा में कैश डिपॉजिट कराए थे लेकिन उनके टैक्स प्रोफाइल से डाटा मेल नहीं खा रहे थे। आय कर विभाग के मुताबिक, 12 मई, 2017 तक इनमें से 9.72 लाख लोगों ने अपने-अपने जवाब दाखिल किए हैं। इन लोगों के जवाब में कुल 13.33 लाख बैंक खातों का जिक्र है जिनमें नोटबंदी के दौरान कुल 2.89 लाख करोड़ रुपये जमा किए गए थे। आयकर विभाग ने लोगों से कहा है कि लोग ऑनलाइन भी अपना जवाब दे सकते हैं। ऐसे लोगों का जवाब अगर संतोषजनक पाया गया तो उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी।
गौरतलब है कि पिछले साल आठ नवंबर की रात आठ बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 रुपये के पुराने करेंसी नोटों को प्रचलन से बाहर करने का ऐलान किया था। पीएम मोदी ने तब कहा था कि लोग 30 दिसंबर, 2016 तक बैंकों में जाकर पुराने नोट जमा कर दें। पीएम मोदी के इस फैसले से रातों-रात  करीब 18 लाख करोड़ रुपये चलन से बाहर हो गए थे। इसके बाद देश को कैश की किल्लत झेलनी पड़ी थी। कुछ महीने तक बैंकों और एटीएम सेंटर्स के सामने लोगों की लंबी-लंबी कतारें लगी रहती थीं।

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