पायस ने दावा करते हुए कहा कि साल 1999 में सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस वाधवा ने मुझे दोषी करार नहीं दिया था। लेकिन फिर भी मैं सजा काट रहा हूं।


भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 21 मई, 1991 में तमिलनाडु में एक चुनावी सभा में आत्मघाती हमले में मौत हो गई थी। 

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के प्रमुख दोषियों में से एक श्रीलंकाई नागरिक रॉबर्ट पायस ने बुधवार (21 जून, 2017) को तमिलनाडु सरकार को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की मांग जाहिर की है। सूबे के मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी को लिखे एक भावुक पत्र में हत्या के दोषी रॉबर्ट पायस ने लिखा, ‘मुझे दया के आधार पर मौत दे देनी चाहिए और शव को मेरे परिवार को सौंप दिया जाए।’ पायस ने पीटीआई को बताया कि उसने दया याचिका पुझल जेल अधिकारियों के माध्यम से सरकार के समक्ष भेजी है। केंद्र और पूर्व की यूपीए सरकार पर आरोप लगाते हुए पायस ने कहा कि इन सरकारों पर निर्भर रहने का कोई फायदा नहीं। पता नहीं हमारी रिहाई पर रोक क्यों लगाई गई है। पायस ने आगे कहा कि जेल की लंबी सजा की वजह से ना केवल उसे बल्कि उसके परिवार को भी सजा मिली है। बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता ने इन दोषियों को रिहा करने की बात कही थी।
राजीव गांधी के हत्या के दोषी पायस ने आगे कहा, ‘केंद्र सरकार ने फैसला लिया है कि हमारी जिंदगी जेल की चार दीवारों में ही खत्म हो जाए। हमें पता था कि राज्य और केंद्र सरकारों का फैसला हमें जेल में बंद रखने का था। इसलिए में इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि जब जेल से रिहा होने की कोई उम्मीद ही नहीं तो जीने का क्या फायदा।’ पायस ने आगे कहा कि इस साल 11 जून को उन्हें जेल में रहते हुए पूरे 26 साल हो गए हैं। अब 27वां साल लग चुका है। पिछले कई सालों में मेरे परिवार और अन्य रिश्तेदार भी मुझसे मिलने नहीं आए। इसलिए मुझे नहीं लगता कि मेरी जिंदगी का अब इसका कोई मतलब रह गया है।
अपने पत्र में पायस ने ये लिखा-

‘पूर्व दिवंगत सीएम जयललिता ने तमिलों की मांग पर दोषियों की रिहाई का फैसला किया था। ये तमिल महज तमिलनाडु के नहीं बल्कि पूरी दुनिया के थे। मगर केंद्र ने निर्णय लिया कि हमारी जिंदगी जेल में ही खत्म होगी। आज केंद्र और राज्य सरकार दोनों खामोश हैं। अब उन्हें बताना होगा कि हमारी जिंदगी क्या सिर्फ जेल में खत्म होगी। हालांकि मुझे पता है कि दोनों सरकारें इसपर क्या सोचती हैं। ये भी अच्छे से जानता हूं कि मेरे जीने का अब कोई मतलब नहीं है, क्योंकि मेरी रिहाई नहीं हो सकती। मुझे जेल में 26 साल हो गए हैं। अब मैं मौत चाहता हूं। पिछले कई सालों में मुझसे कोई मिलने भी नहीं आया। मुझे नहीं लगता कि मेरी जिंदगी का क्या मतलब है। वहीं पायस ने दावा करते हुए कहा कि साल 1999 में सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस वाधवा ने मुझे दोषी करार नहीं दिया था। लेकिन फिर भी मैं सजा काट रहा हूं।’

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