अंबाला । केंद्र सरकार की जीएसटी काउंसिल ने एचएस कोड 90 के तहत चार वैज्ञानिक उपकरण पर जीएसटी दर 28 से घटा कर 18 प्रतिशत कर दी गई है। यह वैज्ञानिक उपकरणों का एक बहुत ही छोटा सा हिस्सा है और ज्यादातर हार्डवेयर में इस्तेमाल होता है। इसीलिए साइंस इंडस्ट्री की मांग है कि जीएसटी काउंसिल 18 जून को अपनी दूसरी बैठक में इस मसले का हल करे और जीएसटी की दर को वर्तमान 5 प्रतिशत टैक्स पर ही रहने दें। यह मांग साइंटिफिक ऐपरैटस मैन्युफैक्चरर एंड एक्सपो‌र्ट्स एसोसिएशन के प्रधान अरुण प्रकाश बंसल की ओर से छावनी के फीनिक्स क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान रखी गई।

इस प्रेसवार्ता में कंफेडरेशन ऑफ एजुकेशन साइंटिफिक ट्रेडर्स एसोसिएशन दिल्ली के कनवीनर जसमीत सिंह में भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि मंत्री डॉ. हर्षवर्धन से भी उन्होंने मुलाकात की है और एक जीएसटी स्लैब को कम करने की मांग उनके सामने रखी है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि 18 जून को जीएसटी काउंसिल उनकी मांग पर जरूरी विचार करेगी। उन्होंने कहा कि साइंस के उपकरणों को एचएच 9011, एचएच 9012 और एचएच 9023 कैटेगरी में रखा गया है। इन कैटेगरी पर सरकार ने 28 प्रतिशत की दर रखी है जोकि साइंस इंडस्ट्री की कमर तोड़ देगी। इसकी वजह यह है कि यह इंडस्ट्री माइक्रो, स्माल और मीडियम उद्योग की श्रेणी में आते हैं। केंद्र सरकार इस उद्योगों को प्रोत्साहन भी दे रही है लेकिन सरकार का यह फैसला इंडस्ट्री को डुबा रहा है। यदि जीएसटी इस इंडस्ट्री पर लागू होता है तो शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की कीमत 25 से 40 प्रतिशत बढ़ जाएगी। इसके अलावा 10 लाख की टर्नओवर वाली साइंस इंडस्ट्री को भी 50 करोड़ वाली साइंस इंडस्ट्री के सामान जीएसटी के नियम अपनाने होंगे। मल्टी नेशनल कंपनियों की तरह छोटी से लेकर बड़ी इंडस्ट्री में काम होगा। इसीलिए यूनियन की मांग है कि उनकी मांगों पर पुनर्विचार किया जाए। सेम के उपप्रधान सतीश सैनी, उमेश गुप्ता, अशोक गुप्ता, अंकुर छाबड़ा, अमित जैन, दिनेश अग्रवाल, मनीष गुपत, सोनू चोपड़ा, सचिन गोयल, चंद्र प्रकाश अग्रवाल समेत अन्य लोग मौजूद थे।

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