2015 में भारत को मिलने वाली कुल विदेशी रकम 3.1 अरब डॉलर थी। इस रकम में अमेरिका का योगदान महज 100 मिलियन डॉलर था। 2018 में ये रकम घटकर मात्र 34 मिलियन डॉलर रह गयी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पेरिस जलवायु समझौते से अपने देश के हटने की वजह बताते हुए भारत और चीन पर कई आरोप लगाये। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत जलवायु समझौते पर हस्ताक्षर कर अरबों डॉलर की कमाई कर रहा है। ट्रंप ने व्हाइट हाउस के रोज गार्डन से बृहस्पतिवार को दिये अपने संबोधन में कहा कि भारत जलवायु समझौते में शामिल होने के लिए इसलिए इच्छुक है क्योंकि उसे विकसित देशों से अरबों, अरबों और अरबों डॉलर मदद के रूप में मिलते हैं। अपने 27 मिनट के भाषण में ट्रंप ने कहा कि पेरिस जलवायु समझौता अमेरिका के साथ नाइंसाफी है।
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, ट्रंप का दावा कि भारत पेरिस जलवायु समझौते में शामिल होने के एवज में अरबों डॉलर की मदद ले रहा है, गलत है। और ऐसे झूठ डोनाल्ड ट्रम्प अक्सर बोलते रहते हैं। बता दें कि 2015 में भारत को मिलने वाली कुल विदेशी रकम 3.1 अरब डॉलर थी। इस रकम में अमेरिका का योगदान महज 100 मिलियन डॉलर था। 2018 में ये रकम घटकर मात्र 34 मिलियन डॉलर रह गयी है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका से भारत को मिलने वाली मदद की रकम बेहद कम है। भारत का मानना है कि अमेरिका से मिलनी वाली विदेशी मदद अब लगभग बंद सी हो गई है। जबकि भारत सिर्फ 100 मिलियन डॉलर का कैलिफोर्नियां बादाम ही हर साल अमेरिका से आयात करता है। इसके अलावा भारत हर साल अरबों डॉलर के हथियार भी अमेरिका से खरीदता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि इस जलवायु समझौते के तहत 2020 तक भारत अपने कोयला उत्पादन को दोगुना कर सकेगा और चीन कई कोयला आधारित ऊर्जा घर खोल सकेगा लेकिन अमेरिका नहीं। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर पेरिस समझौता लागू हो गया तो 2025 तक अमेरिका को 27 लाख नौकरियां गंवानी पड़ेगी। हालांकि कई अमेरिकी विशेषज्ञ भी ट्रम के इस दावे पर संदेह जता रहे हैं।

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