Excerpt: Little Miss Universe 2017: पदमाल्या नंदा उड़ीसा की पहली शख्स हैं जिन्होंने इस तरह की उपलब्धि हासिल की है। पदमाल्या ने इससे पहले केरल के कोझीकोड में आयोजित लिटिल मिस जूनियर मॉडल इंटरनेशनल का खिताब भी जीता था।

उड़ीसा की पदमाल्या नंदा लिटिल मिस यूनीवर्स ब्यूटी पीजेंट में भारत का नेतृत्व करेगीं। पदमाल्या की उम्र केवल 12 साल है। ये प्रतियोगिता जॉर्जिया (अमेरिका) में 31 मई से होगी। पदमाल्या को अंतिम 16 कंटेस्टेंट में से फाइनल में भारत का नेतृत्व करने के लिए चुना गया है। वो उड़ीसा की पहली शख्स हैं जिन्होंने इस तरह की उपलब्धि हासिल की है। पदमाल्या ने इससे पहले केरल के कोझीकोड में आयोजित लिटिल मिस जूनियर मॉडल इंटरनेशनल का खिताब भी जीता था। 12 साल की पदमाल्या कटक के स्टीवर्ट स्कूल में 8वीं की छात्रा हैं। इससे पहले उन्होंने द बेस्ट बॉल गाउन, बेस्ट प्री टीन जेएमआई (ज्यूरी के निर्णय से) और बेस्ट प्री टीन जेएमआई (पीपुल्स च्वाइस) के खिताब भी जीते हैं।

पदमाल्या 2017 में ही ग्रीस में होने वाले लिटिल मिस वर्ल्ड में भी भारत का नेतृत्व करेगीं। इस बारे में पता चलने पर पदमाल्या ने कहा कि  मेरा टारगेट अब वर्ल्ड फाइनल्स में अच्छा प्रदर्शन करने पर है क्योंकि मैं इनमें भारत का नेतृत्व कर रही हूं। मैं दोनों प्रतियोगिताओं में अपना बेस्ट देने की कोशिश कंरुगीं। पदमाल्या सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रसन्न कुमार नंदा और डॉक्टर सुभासुधा प्रियदर्शी की बेटी हैं। वो मॉडलिंग और फैशन डेजाइनिंग में दिलचस्पी रखती हैं लेकिन अभी अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहती हैं। इन कॉन्टेस्ट्स में मिली अपनी सफलता को वो अपने माता पिता से मिले सपोर्ट का परिणाम मानती हैं।
उड़ीसा टीवी के अनुसार पदमाल्या ने इस मौके पर उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से मुलाकात भी की। दोनों की मुलाकात के बाद पदमाल्या ने कहा- “मैं इस प्रतियोगिता के लिए पूरी तरह तैयार हूं। ये एक आर्ट, कल्चर, इंटेलीजेंस और टैलेंट के फेस्टीवल की तरह है। ये वो मौका है जहां आप अपने टैलेंट और कल्चर को प्रमोट कर सकते हैं।”

नंदा इस प्रतियोगिता में 15 और कंटेस्टेंट का सामना करेगीं। पदमाल्या उड़ीसा के राज्यपाल एस सी जमीर से भी मुलाकात कर चुकी हैं। भारत के लिए ये मौका खास है इससे 23 साल पहले साल 1994 में सुष्मिता सेन ने मिस यूनीवर्स का खिताब अपने नाम किया था। इसके बाद साल 2000 में बॉलीवुड एक्ट्रेस लारा दत्ता ने इस खिताब को अपने नाम किया था। तब से अब तक तीसरी बार कोई इस खिताब को हासिल नहीं कर पाया है।

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