रेवाड़ी। हरियाणा पुलिस में एएसआई अजय टक्खड़ की पत्नी और पेशे से नर्स आशा सिंह (39) ने आज चीन की ओर से सुबह 4.05 बजे माउंट एवरेस्ट को फतेह कर लिया। आशा दो बच्चों की मां है। अजय आजकल रेवाड़ी में तैनात हैं, जबकि आशा खुद राजस्थान में काम करती है। वे अलवर जिले में कोटकासिम के जाटूवास प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ हैं।

 गौरतलब है कि उसकी मां कृष्णा देवी ने उसकी इस इच्छा को पूरा करने के लिए अपने गहने ओर जमीं तक बेचने के लिए तैयार हो गई। ट्रेनिंग और अभियान के लिए 25 लाख रुपये बैंक लोन और भविष्य निधि खाते से जुटाए।
  आशा ने अपनी यात्रा 8 अपैल को शुरू की थी। 7 जुलाई, 1978 को जन्मी आशा का विवाह 1998 में अजय से हुआ था।  17 और 14 साल के उनके 2 बच्चे हैं।
उसके पति अजय टक्खड़ के अनुसार वह स्टाॅफ नर्स बतौर काम कर रही है, लेकिन वह दूरस्थ शिक्षा माध्यम से बीए और एमए की डिग्री प्राप्त कर चुकी है तथा अब पीएचडी कर रही है।
  रेवाड़ी की एसपी संगीता कालिया ने आज आशा सिंह और उसके पति को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि हर परेशानी को पार करते हुए आशा ने यह गजब की दृढ़ता दिखाई। 

माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने वालों की संख्या में जहां दिनों-दिन इजाफा हो रहा है, वहीं यहां चढ़ाई करने के दौरान अपनी जान गंवाने वाले पर्वतारोहियों की संख्या में बढ़ रही है। पिछले छह दिनों में दो से तीन पर्वताराहियों की मौत की खबर सामने आई है। माउंट एवरेस्ट फतेह करना वाकई एक बहुत बड़ा मिशन है, जिसे पूरा करने की इच्छा हर पर्वतारोही की होती है। 
  हाल ही में सभी बाधाओं से जूझते हुए राजस्थान की आशा झाझडिय़ा ने माउंट एवरेस्ट फतेह कर लिया है। आशा ने सुबह 4 बजे माउंट एवरेस्ट फतेह किया। उनकी इस उपलब्धि की खबर मिलते ही उनके पैतृक गांव झूंझनू में खुशी का माहौल हो गया।
पीएफ की राशि भी निकाल ली-
आशा ने बताया कि माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई के लिए 28 लाख रूपए की जरूरत थी। एवरेस्ट की चोटी नेपाल और चीन में है। पैसे जमा होने के बाद ही अनुमति मिली। भाई विक्रम सिंह ने बताया कि आशा ने 28 लाख रूपए की व्यवस्था जान पहचान वालों , रिश्तेदारों और अपने पीएफ अकाउंट से पैसे निकालकर की। आशा की इस आशा को साकार करने में रेवाड़ी के एडीसी जो अब पंचकूला में हैं ने बहुत मदद की।

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