★नगर निगम अम्बाला में 22 एकड़ भूमि की सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के नाम

अम्बाला।
स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज की विशेष प्राथमिकताओं में शामिल अम्बाला छावनी में 1857 की क्रांति के शहीदों की याद में बनने वाले अंतर्राष्ट्रीय शहीद स्मारक की स्थापना की प्रक्रिया तेज हो गई है। आज नगर निगम अम्बाला ने 22 एकड़ भूमि सूचना, जन सम्पर्क एवं भाषा विभाग हरियाणा के नाम हस्तांतरित कर दी है। उपायुक्त प्रभजोत सिंह ने बताया कि इस भूमि के हस्तांरण रिकार्ड पर सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के निदेशक टी.एल. सत्यप्रकाश की ओर से नोडल अधिकारी एवं उप निदेशक श्रीमती वंदना शर्मा ने हस्ताक्षर किये जबकि निगम आयुक्त सत्येन्द्र दुहन की ओर से कार्यकारी अधिकारी ओ.पी. सिहाग ने हस्ताक्षर किये। अम्बाला छावनी में तहसीलदार का पद रिक्त होने के कारण इस भूमि के हस्तांतरण की प्रक्रिया बराड़ा के तहसीलदार पुण्यदीप शर्मा ने की। 
एसडीएम सुभाष चंद्र सिहाग ने बताया कि अम्बाला छावनी में अम्बाला-दिल्ली मार्ग पर 22 एकड़ क्षेत्र में 1857 की क्रांति के शहीदों की याद में अंतर्राष्ट्रीय स्तर का शहीदी स्मारक बनाया जा रहा है। इस स्मारक में 1857 की क्रांति से जुड़े देश के सभी महान स्वतंत्रता सैनानियों के जीवन का विवरण होने के साथ-साथ लेजर शो के माध्यम से शहीदों के संघर्ष की कहानी को ब्यान करने की सुविधा भी होगी। दिल्ली से अमृतसर के बीच जलियांवाला बाग के स्मारक के बाद यह एकमात्र शहीद स्मारक होगा जिसमें देश और विदेश के पर्यटक व नागरिक स्वतंत्रता संग्राम के पहले संघर्ष के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। ऐसे पर्यटकों की सुविधा के लिए इस स्मारक के साथ हैलीपैड का प्रावधान भी किया गया है। 
अम्बाला छावनी में 10 मई 1857 को मेरठ से 6 घंटे पहले सैनिकों ने विद्रोह किया था यह दावा हरियाणा के जन सूचना एवं लोकसंपर्क विभाग की प्रेस विज्ञप्ति में किया गया है,लेकिन सरकार द्वारा गठित स्मारक कमेटी के सदस्य इतिहासकार डॉ के सी यादव और उनके साथी कुछ और दावा करते हैं।

(इतिहासकार डॉ. के सी यादव, डॉ यू वी सिंह और डॉ जगदीश चंद्र के अनुसार ब्रिटिश सैन्य बैरकों में अंबाला छावनी से भारतीयों ने मेरठ से 9 घँटे पहले विद्रोह कर दिया था) 

और इस महत्व के कारण ही अम्बाला छावनी में राज्य सरकार द्वारा इस स्मारक की स्थापना की जा रही है। इस स्मारक में 70 फुट उंचाई के विशाल और आकर्षक शहीदी स्मारक के साथ-साथ 20-20 फुट ऊंचाई की दो दीवारें बनाई जायेंगी, जिन पर 1857 की क्रांति के योद्धाओं का उल्लेख किया जायेगा। इस स्मारक में विकसित किए जाने वाले 6 लॉन में 1857 की क्रांति के विवरणों का उल्लेख होगा तथा अम्बाला के इतिहास तथा 1857 की क्रांति में हरियाणा के स्वतंत्रता सेनानियों पर आधारित म्यूजियम भी बनाया जायेगा। इस स्मारक में 500 व्यक्तियों की क्षमता वाला ऑडिटोरियम/सभागार हाल बनाया जायेगा। इसके साथ-साथ पुस्तकालय, ऑडिया -वीडियो म्यूजियम/गैलरी/फूड कोर्ट का निर्माण करने की योजना है। इसके अलावा इस शहीदी स्मारक में कवर्ड पार्किंग, चिल्ड्रन पार्क, जनसुविधाएं, रिफ लैक्टिंग पूल तथा आउटडोर कैफेटेरिया की सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई जायेंगी। उन्होंने बताया कि अन्य विशेषज्ञों की राय के मुताबिक इसमें और अधिक विस्तार तथा सकारात्मक फेरबदल पर भी विचार किया जा सकता है। 

उल्लेखनीय है कि अनिल विज वर्ष 2000 से लगातार विधानसभा में इस स्मारक की स्थापना की मांग उठाते रहे हैं और अब उनके प्रयासों से ही यह स्मारक बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। भूमि स्थानांतरण की औपचारिकताओं के बाद लोक निर्माण विभाग द्वारा टैंडर प्रक्रिया आरम्भ की जायेगी जिसके प्रथम चरण में इस स्थान की चारदीवारी और गहरे क्षेत्रों में मिट्टी भरने का कार्य किया जायेगा।

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