अंबाला। भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव की मौत की सजा पर सोमवार को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में सुनवाई होनी है। इससे पहले 10 मई को इंटरनेशनल कोर्ट ने पाकिस्तान की ओर से लगाए गए जासूसी के आरोप में कुलभूषण जाधव को दी गई फांसी की सजा पर रोक लगा दी थी।
भारत ने जाधव की हिरासत और मुकदमे के मामले में ‘वियना संबंधों के उल्लंघन’ का आरोप लगाते हुए अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में पाकिस्तान के खिलाफ अपील की थी। भारत ने आईसीजे से जाधव की मौत की सजा पर रोक लगाने की मांग की थी।
भारत ने क्या कहा था कोर्ट में?
आईसीजे से की गई अपील में भारत ने पाकिस्तान पर राजनयिक संबंधों पर वियना सम्मेलन के खुलेआम उल्लंघन का आरोप लगाया है। भारत ने इस बात पर जोर दिया है कि जाधव का ईरान से अपहरण किया गया था। जाधव भारतीय नौसेना से रिटायर होने के बाद ईरान में व्यावसायिक कामों से गए हुए थे। हालांकि, पाकिस्तान का दावा है कि उनके सुरक्षाबलों ने तीन मार्च, 2016 को बलूचिस्तान से जाधव को गिरफ्तार किया।
भारत ने अपनी अपील में कहा कि उसे जाधव की गिरफ्तारी के लंबे समय बाद तक भी इसकी सूचना नहीं दी गई और पाकिस्तान आरोपी को उसके अधिकारों की जानकारी देने में भी असफल रहा है।
भारत ने आगे कहा कि वियेना सम्मेलन का उल्लंघन करते हुए पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव को काउंसलर दिए जाने की मांग को ठुकरा दिया था। भारत सरकार ने अपील की थी कि कुलभूषण की कानूनी मदद के लिए राजनयिक पहुंच दी जाए।

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