अंबाला। गांव भुडंगपुर के प्रगतिशील पशुपालक हरबिलास सिंह ने सिद्ध कर दिया है कि यदि जीवन में बडा लक्ष्य हासिल करने की तमन्ना हो तो किसी भी कार्य में महारत और सोहरत हासिल की जा सकती है। हरबिलास सिंह मुरर्हा नस्ल की भैंसे पालकर सामान्य पशुपालकों की तुलना में न केवल कईं गुणा अधिक आय अर्जित कर रहा है बल्कि अपनी इस उपलब्धि के लिए वह 4 बार मुख्यमंत्री द्वारा तथा एक बार प्रदेश के कृषि मंत्री द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। 

उन्होने बताया कि वह एक भैंस को प्रतिदिन 280 रूपये से लेकर 310 रूपये तक की खुराक व चारा देता है और भैंस से प्रतिदिन मिलने वाले दूध से उसे 700 से 750 रूपये तक औसत आमदन होती है। उन्होने कहा कि पहले वह भी सामान्य पशुपालकों की तर्ज पर मिश्रित नस्ल के दुधारू पशु पालता था जो न केवल घाटे का सौदा थे बल्कि अधिक खर्चा करने के बावजूद उनमें दूध उत्पादन बढाने की क्षमता नहीं थी। 
हरबिलास ने बताया कि वर्ष 2003 में पशुपालन विभाग के उप निदेशक डा0 प्रेम सिंह व अन्य विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में उसने 21 हजार रूपये में 15 लीटर दूध क्षमता की मुरर्हा नस्ल की भैंस खरीदी थी। कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से उसने इस भैंस से 18 लीटर दूध देने वाली संतान हासिल की और उसके बाद नस्ल सुधार के क्रम में चौथी पीढी में उसने 25 लीटर 700 ग्राम प्रतिदिन दूध देने वाली मुरर्हा नस्ल की भैंस तैयार करके न केवल अपनी आमदनी बढाई है बल्कि इस उपलब्धि के लिए उन्हें जिला और प्रदेश स्तर पर पहचान भी मिली है। उन्होने बताया कि उनके पास उपलब्ध 9 भैंसो में से प्रत्येक भैंस दूध के एक सीजन लगभग 10 महीने में 50 किवंटल दूध का उत्पादन देती है और उनकी संतान को 2 वर्ष 6 महीने में भैंस बनाकर वह उसे एक लाख रूपये से लेकर ढाई लाख रूपये तक बेचता है। यही नहीं इस नस्ल के कटडे को भी वह दो महीने से लेकर 10 महीने की उम्र में बेहतर खुराक देकर बिक्री के लिए तैयार करता है और ये आयु के मुताबिक 70 हजार से एक लाख रूपये तक बिक जाते हैं। 
उन्होने बताया कि पिछले 5 वर्षों से वे घर में रसोई गैस (एलपीजी) का प्रयोग नहीं करता क्योंकि रसोई गैस का पूरा प्रबंध उन्होने गौबर गैस प्लांट के माध्यम से किया हुआ है। उनकी डेयरी और घर में बिजली का बिल नहीं आता क्योंकि उन्होंने पूरा सिस्टम सौलर लाईट पर निर्भर किया हुआ है। इसी प्रकार गांव भुडंगपुर के ही दर्शन सिंह, गांव बलाना के गुरमीत सिह व गुरतेज सिंह ने बताया कि वे भी हरबिलास सिंह से प्रेरणा लेकर मुरर्हा नस्ल के दुधारू पशु पालते हैं। 

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