पटना। ‘युवा संवाद अभियान’ के राष्ट्रीय संयोजक और देश के जानेमाने गांधी विचारक अशोक भारत का कहना है कि महात्मा गांधी ने जिन मूल्यों को लेकर देश निर्माण की बात कही थी, आज ठीक उसके विपरीत माहौल है। माहौल बदलने के लिए युवाओं से संवाद करना और उन्हें जोड़ना आज की जरूरत है।


वह कहते हैं, “गांधीजी ऐसा स्वराज चाहते थे, जिसमें समाज का अंतिम व्यक्ति यह महसूस करे कि वह आजाद है और देश के विकास में उसका महत्वपूर्ण योगदान है। लेकिन आजादी के 70 साल बाद भी बापू का यह सपना, सपना ही बना हुआ है।”

चंपाराण सत्याग्रह के 100 साल पूरे होने पर आयोजित समारोह में भाग लेने यहां आए भारत ने आईएएनएस के साथ विशेष बातचीत में ‘युवा संवाद अभियान’ के विषय में बताते हुए कहा, “यह युवाओं का एक राष्ट्रीय अभियान है। यह युवाओं से देश-समाज की ज्वलंत समस्याओं पर संवाद कर उन्हें भावी चुनौतीओं के लिए तैयार करने तथा सामाजिक सरोकार से जोड़ने का अभियान है।”

उन्होंने कहा कि हर चुनौती एक अवसर भी होता है। चुनौतियों को अवसर में बदलने का ही ‘युवा संवाद अभियान’ नाम है।

जानेमाने सामाजिक कार्यकर्ता बाबा आमटे के साथ साइकिल यात्रा कर चुके भारत ने बिहार में चंपाराण सत्याग्रह समारोह के विषय में पूछे जाने पर कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गांधी के सत्याग्रह को लेकर जो माहौल तैयार किया है, वह प्रशंसनीय है, मगर इसमें असली गांधी के विचार नहीं दिखाई दे रहे हैं।

अशोक भारत सर्व सेवा संघ प्रकाशन के संयोजक रहे हैं। उन्होंने कहा कि गांधी किसानों के सवाल पर चंपारण आए थे, लेकिन आज भी चंपाारण के किसानों की हालत दयनीय बनी हुई है। उन्होंने कहा कि चंपारण की थारू जनजाति की महिलाएं, जो पहले अवैध रूप से शराब बनाकर अपना जीवनयापन करती थीं, आज भुखमरी के कगार पर पहुंच गई हैं। उनके पास रोजगार का कोई साधन नहीं है।

उन्होंने कहा कि नीतीश को उन गांवों में जाकर गांधी के सपने और विचारों को पूरा करन होगा। बिहार में शराबबंदी को सराहते हुए भारत ने कहा कि इससे गांवों में शांति का भाव देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि गांधी ने शिक्षा पर काफी जोर दिया था, लेकिन उनके सपने के बुनियादी विद्यालयों की हालत बिहार में काफी बदतर है।

पूरे देश में चलाए जा रहे ‘युवा भारत अभियान’ के समन्वयक रहे भारत कहते हैं, आज युवा वर्ग के सामने सबसे बड़ी चुनौती राष्ट्रीयता और उसकी पहचान बनाने की है।

उन्होंने कहा कि पारंपरिक रूप से जो छवि हमें मिली है, वह है मातृभूमि की जो ‘सुजलाम् सुफलाम् मलयज शीतलाम् है, शस्य श्यामलाम् है’ जिसका हम नमन करते हैं। लेकिन आज पूंजीवादी व्यवस्था में यह तहस-नहस हो गई है।

उन्होंने कहा कि गांधी के विचारों और सपनों को अब तक आई सभी सरकारों ने अपने लिए भुनाया है, मगर उनके सपनों के भारत को वे पीछे छोड़ते चले गए।

आज के दौर में गांधी के विचारों को सबसे ज्यादा प्रासंगिक बताते हुए उन्होंने कहा कि आज ‘धर्म’ और ‘जाति’ के नाम पर देश तोड़ने की बात हो रही है। आज ऐसी स्थिति पैदा की जा रही है कि ‘भारत माता की जय’ बोले तो पिटाई और नहीं बोले तो भी पिटाई।

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