नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा बुधवार को वीवीपीएटी मशीनों की खरीद के लिए कोष को मंजूरी देने पर निर्वाचन आयोग ने कहा कि इससे साल 2019 लोकसभा चुनाव में सभी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (ईवीएम) वीवीपीएटी से लैस होंगी। केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि वह वोटर वेरिफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) मशीनों की खरीद के लिए दो वर्षों में निर्वाचन आयोग को 3,173.47 करोड़ रुपये मुहैया ईवीएम मशीन से जुड़ी वीवीपीएटी में ईवीएम का बटन दबाने पर वीवीपीएटी से एक पर्ची निकलेगी, जिसे देखकर मतदाता संतुष्ट होगा कि उसने जिस उम्मीदवार को मतदान किया, उसका मत उसी को गया। पेपर स्लिप निर्वाचन आयोग के पास रिकॉर्ड के रूप में सुरक्षित रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश तथा भारत निर्वाचन आयोग की सिफारिश के मुताबिक, सरकार ने 16,15,000 वीवीपीएटी मशीनों की खरीद के लिए 3,173.47 करोड़ रुपए की राशि को मंजूरी दी है। निर्वाचन आयोग ने बुधवार को एक बयान में कहा, इसके साथ ही आयोग सर्वोच्च न्यायाल के आदेश के पालन और साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में हर ईवीएम को वीवीपीएटी से जोडऩे की उसकी कटिबद्धता सुनिश्चित होगी। निर्वाचन आयोग ने कहा कि साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले सभी वीवीपीएटी मशीनें मिल जाएं, इसके लिए वह वीवीपीएटी मशीनों के उत्पादन पर नजर रखेगा।

वीवीपीएटी के जरिए मतदाताओं को फौरी फीडबैक 

 

विशेष फीचर-8

आम चुनाव-2014

 

     मतदाता पावती रसीद यानी वोटर वेरिफायड पेपर ऑडिट ट्रायल (वीवीपीएटी) मतपत्र रहित मतदान प्रणाली का इस्तेमाल करते हुए मतदाताओं को फीडबैक देने का तरीका है। इसका उद्देश्य इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों की स्वतंत्र पुष्टि है। यह व्यवस्था मतदाता को इस बात की पुष्टि करने की अनुमति देती है कि उसकी इच्छानुसार मत पड़ा है या नहीं। इसे वोट बदलने या वोटों को नष्ट करने से रोकने के अतिरिक्त उपाय  के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

      वीवीपीएटी के तहत प्रिंटर की तरह का एक उपकरण इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से जुड़ा होता है। जब वोट डाला जाता है तब इसकी एक पावती रसीद निकलती है इस पावती पर क्रम संख्या, नाम तथा उम्मीदवार का चुनाव चिन्ह दर्शाया जाता है। यह उपकरण वोट डाले जाने की पुष्टि करता है तथा इससे मतदाता ब्यौरों की पुष्टि कर सकता है। रसीद एक बार दिखने के बाद ईवीएम से जुड़े कन्टेनर में चली जाती है। दुर्लभतम मामलों में केवल चुनाव अधिकारी को ही इस तक पहुंच हो सकती है।

      यह प्रणाली पहली बार प्राप्त रसीद के आधार पर मतदाता को अपने वोट को चुनौती देने की अनुमति देती है। नये नियम के अनुसार मतदान केन्द्र के पीठासीन अधिकारी को मतदाता की अस्वीकृति दर्ज करनी होगी तथा इस अस्वीकृति को गिनती के समय ध्यान में रखना होगा।

      वीवीपीएटी प्रणाली का निर्माण ईवीएम पर संदेहों के कारण नहीं बल्कि प्रणाली को उन्नत बनाने के हिस्से के रूप में हुआ था।

वीवीपीएटी  उपयोग को बढ़ावा देने वाली घटनाओं का क्रमिक विकासः

v     04 अक्तूबर, 2010 को आयोजित सर्वदलीय बैठक में ईवीएम के इस्तेमाल को जारी रखने के बारे में व्यापक सहमति थी तथा अनेक राजनीतिक दलों ने सुझाव दिया कि वीवीपीएटी को शामिल करने की संभावना तलाशी जानी चाहिए।

v      निर्वाचन आयोग ने वीवीपीएटी की संभावना जानने के लिए मामले को विशेषज्ञ समिति के पास भेजा तथा इसके निर्माताओं- भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड ,बंगलौर (बीईएल) तथा इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, हैदराबाद (ईसीआईएल) को वीवीपीएटी प्रणाली का नमूना (प्रोटोटाइप) विकसित करने का निर्देश दिया।

v     तकनीकी विशेषज्ञ समिति की सिफारिश पर जुलाई, 2011 में आम मतदाताओं, राष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय राजनीतिक दलों, सिविल सोसाइटी संगठनों तथा मीडिया की मौजूदगी तथा उनकी भागीदारी के साथ फील्ड में इसका प्रयोग तिरूअनंतपुरम, दिल्ली, जैसलमेर, चेरापूंजी तथा लेह में किया गया।

v     पहले फील्ड प्रयोग के बाद समिति की सिफारिश के आधार पर इसमें परिवर्तन किया गया।फील्ड में इसका दूसरा प्रयोग जुलाई-अगस्त, 2012 में दिल्ली, तिरूअनंतपुरम, लेह, जैसलमेर तथा चेरापूंजी में किया गया। तकनीकी विशेषज्ञ समिति ने 19 फरवरी, 2013 को अपनी बैठक में वीवीपीएटी की अन्तिम डिजाइन को मंजूरी दी।

v     भारत सरकार ने 14 अगस्त, 2013 को एक अधिसूचना के जरिए चुनाव कराने संबंधी नियम, 1961 को संशोधित किया। इससे आयोग को इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों के साथ वीवीपीएटी के इस्तेमाल का अधिकार मिला।

v     सितम्बर, 2013 में नगालैण्ड के त्वेनसांग में नोकसेन विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के लिए ईवीएम के साथ वीवीपीएटी का प्रयोग किया गया।

v     उच्चतम न्यायालय ने अक्तूबर, 2013 में सुब्रम्णयम स्वामी बनाम भारत निर्वाचन आयोग मामले में व्यवस्था देते हुए कहा कि वीवीपीएटी स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनावों के लिए अपरिहार्य है तथा भारत निर्वाचन आयोग को वीवीपीएटी प्रणाली की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए ईवीएम को वीवीपीएटी से जोड़ने का निर्देश दिया।

v     उच्चतम न्यायालय ने निर्वाचन आयोग को 2014 के अगले आम चुनावों के लिए चरणबद्ध तरीके से ईवीएम में पावती रसीद लागू करने का निर्देश देते हुए कहा कि इससे स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित होगा। शीर्ष न्यायालय ने वीवीपीएटी प्रणाली लागू करने के लिए केन्द्र को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

v     निर्वाचन आयोग ने उच्चतम न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में वीवीपीएटी प्रणाली के इस्तेमाल का आदेश दिया। 1,18,596 पंजीकृत मतदाताओं वाले 186 मतदान केन्द्रों में पायलट परियोजना शुरू की गई।

v     निर्वाचन आयोग ने मिजोरम चुनाव विभाग को हाल में 40 सदस्यों वाली मिजोरम विधानसभा के चुनावों के दौरान 10 निर्वाचन क्षेत्रों में वीवीपीएटी प्रणाली के इस्तेमाल का आदेश दिया। वीवीपीएटी प्रणाली दिल्ली, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा राजस्थान के एक-एक निर्वाचन क्षेत्रों में भी लागू की गई।

      आयोग को आगामी लोकसभा चुनावों में सभी 543 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में इस प्रणाली को लागू करने के लिए लगभग 14 लाख वीवीपीएटी मशीनों की आवश्यकता होगी। लेकिन इतने कम समय में इतनी मशीनों के उत्पादन और परीक्षण को लेकर आयोग को आशंका है। आयोग महसूस करता है कि 2019 के आम चुनावों के पहले सभी संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में वीवीपीएटी मशीनें लगाना संभव नहीं होगा। आयोग ने कहा है कि वीवीपीएटी मशीनें प्राप्त करने तथा देश के सभी मतदान केन्द्रों पर इसे लगाने के लिए लगभग 1500 करोड़ रूपयों की आवश्यकता होगी।

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ईवीएम के साथ जुड़ी वोटर वेरीफायबल पेपर ऑडिट ट्रायल (वीवीपीएटी) प्रणाली की तस्वीर

 

वीवीपीएटी के जरिए मतदाताओं को फौरी फीडबैक 

 

     मतदाता पावती रसीद यानी वोटर वेरिफायड पेपर ऑडिट ट्रायल (वीवीपीएटी) मतपत्र रहित मतदान प्रणाली का इस्तेमाल करते हुए मतदाताओं को फीडबैक देने का तरीका है। इसका उद्देश्य इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों की स्वतंत्र पुष्टि है। यह व्यवस्था मतदाता को इस बात की पुष्टि करने की अनुमति देती है कि उसकी इच्छानुसार मत पड़ा है या नहीं। इसे वोट बदलने या वोटों को नष्ट करने से रोकने के अतिरिक्त उपाय  के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

      वीवीपीएटी के तहत प्रिंटर की तरह का एक उपकरण इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से जुड़ा होता है। जब वोट डाला जाता है तब इसकी एक पावती रसीद निकलती है इस पावती पर क्रम संख्या, नाम तथा उम्मीदवार का चुनाव चिन्ह दर्शाया जाता है। यह उपकरण वोट डाले जाने की पुष्टि करता है तथा इससे मतदाता ब्यौरों की पुष्टि कर सकता है। रसीद एक बार दिखने के बाद ईवीएम से जुड़े कन्टेनर में चली जाती है। दुर्लभतम मामलों में केवल चुनाव अधिकारी को ही इस तक पहुंच हो सकती है।

      यह प्रणाली पहली बार प्राप्त रसीद के आधार पर मतदाता को अपने वोट को चुनौती देने की अनुमति देती है। नये नियम के अनुसार मतदान केन्द्र के पीठासीन अधिकारी को मतदाता की अस्वीकृति दर्ज करनी होगी तथा इस अस्वीकृति को गिनती के समय ध्यान में रखना होगा।

      वीवीपीएटी प्रणाली का निर्माण ईवीएम पर संदेहों के कारण नहीं बल्कि प्रणाली को उन्नत बनाने के हिस्से के रूप में हुआ था।

वीवीपीएटी  उपयोग को बढ़ावा देने वाली घटनाओं का क्रमिक विकासः

v     04 अक्तूबर, 2010 को आयोजित सर्वदलीय बैठक में ईवीएम के इस्तेमाल को जारी रखने के बारे में व्यापक सहमति थी तथा अनेक राजनीतिक दलों ने सुझाव दिया कि वीवीपीएटी को शामिल करने की संभावना तलाशी जानी चाहिए।

v      निर्वाचन आयोग ने वीवीपीएटी की संभावना जानने के लिए मामले को विशेषज्ञ समिति के पास भेजा तथा इसके निर्माताओं- भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड ,बंगलौर (बीईएल) तथा इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, हैदराबाद (ईसीआईएल) को वीवीपीएटी प्रणाली का नमूना (प्रोटोटाइप) विकसित करने का निर्देश दिया।

v     तकनीकी विशेषज्ञ समिति की सिफारिश पर जुलाई, 2011 में आम मतदाताओं, राष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय राजनीतिक दलों, सिविल सोसाइटी संगठनों तथा मीडिया की मौजूदगी तथा उनकी भागीदारी के साथ फील्ड में इसका प्रयोग तिरूअनंतपुरम, दिल्ली, जैसलमेर, चेरापूंजी तथा लेह में किया गया।

v     पहले फील्ड प्रयोग के बाद समिति की सिफारिश के आधार पर इसमें परिवर्तन किया गया।फील्ड में इसका दूसरा प्रयोग जुलाई-अगस्त, 2012 में दिल्ली, तिरूअनंतपुरम, लेह, जैसलमेर तथा चेरापूंजी में किया गया। तकनीकी विशेषज्ञ समिति ने 19 फरवरी, 2013 को अपनी बैठक में वीवीपीएटी की अन्तिम डिजाइन को मंजूरी दी।

v     भारत सरकार ने 14 अगस्त, 2013 को एक अधिसूचना के जरिए चुनाव कराने संबंधी नियम, 1961 को संशोधित किया। इससे आयोग को इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों के साथ वीवीपीएटी के इस्तेमाल का अधिकार मिला।

v     सितम्बर, 2013 में नगालैण्ड के त्वेनसांग में नोकसेन विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के लिए ईवीएम के साथ वीवीपीएटी का प्रयोग किया गया।

v     उच्चतम न्यायालय ने अक्तूबर, 2013 में सुब्रम्णयम स्वामी बनाम भारत निर्वाचन आयोग मामले में व्यवस्था देते हुए कहा कि वीवीपीएटी स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनावों के लिए अपरिहार्य है तथा भारत निर्वाचन आयोग को वीवीपीएटी प्रणाली की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए ईवीएम को वीवीपीएटी से जोड़ने का निर्देश दिया।

v     उच्चतम न्यायालय ने निर्वाचन आयोग को 2014 के अगले आम चुनावों के लिए चरणबद्ध तरीके से ईवीएम में पावती रसीद लागू करने का निर्देश देते हुए कहा कि इससे स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित होगा। शीर्ष न्यायालय ने वीवीपीएटी प्रणाली लागू करने के लिए केन्द्र को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

v     निर्वाचन आयोग ने उच्चतम न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में वीवीपीएटी प्रणाली के इस्तेमाल का आदेश दिया। 1,18,596 पंजीकृत मतदाताओं वाले 186 मतदान केन्द्रों में पायलट परियोजना शुरू की गई।

v     निर्वाचन आयोग ने मिजोरम चुनाव विभाग को हाल में 40 सदस्यों वाली मिजोरम विधानसभा के चुनावों के दौरान 10 निर्वाचन क्षेत्रों में वीवीपीएटी प्रणाली के इस्तेमाल का आदेश दिया। वीवीपीएटी प्रणाली दिल्ली, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा राजस्थान के एक-एक निर्वाचन क्षेत्रों में भी लागू की गई।

      आयोग को आगामी लोकसभा चुनावों में सभी 543 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में इस प्रणाली को लागू करने के लिए लगभग 14 लाख वीवीपीएटी मशीनों की आवश्यकता होगी। लेकिन इतने कम समय में इतनी मशीनों के उत्पादन और परीक्षण को लेकर आयोग को आशंका है। आयोग महसूस करता है कि 2019 के आम चुनावों के पहले सभी संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में वीवीपीएटी मशीनें लगाना संभव नहीं होगा। आयोग ने कहा है कि वीवीपीएटी मशीनें प्राप्त करने तथा देश के सभी मतदान केन्द्रों पर इसे लगाने के लिए लगभग 1500 करोड़ रूपयों की आवश्यकता होगी।

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