​भाजपा का कल्चर भी अब कांग्रेसी हो गया है। पिछले तीन बरस में कांग्रेस के हाथ का साथ छोड़कर बीजेपी के कमल को थामने वाले कांग्रेसियों का आगमन निरंतर चल रहा है अब थमने का नाम नहीं के रहा। भाजपा और आरएसएस ने नारा दिया था कांग्रेस मुक्त भारत। 

अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को बीजेपी की बढ़ती ताकत के बाद शायद एहसास होने लगा है कि कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आने वाले नेतायों के बाद भाजपा की संघी सांस्कृतिक अर्धनारीश्वर होती जा रही है। इसी बात से चिंतित नरेंद्र मोदी ने बीजेपी में शामिल हुए नेतायों व कार्यकत्र्तायों को संघी सांस्कृति के तौर तरीकों को अपनाने की नसीहत देनी पड़ी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जानते हैं कि भाजपा की बढ़ती हुई ताकत एव सत्ता सुख के लोभी ही अब तक बीजेपी का दामन थाम रहे हैं। 

  संघ परिवार व बीजेपी और प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी को यह भली भांति समझ लेना चाहिये कि असल नस्ल यानी पैतृक अंश (ज़ीन्स) कभी बदलते नहीं हैं। जनता इस बात को बहुत अच्छी तरह से जानती है कि सत्ता सुख स्वार्थ के लिए पार्टी छोड़कर जाने वाले नेतायों कोई विशेष अंतर आने वाला नहीं। 

ताज़ा मिसाल सबके सामने है हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की सत्ता का तख्ता पलटने के लिए ग़ैर पंजाबी नेता एड्ढी चोटी का जोर लगा रहे हैं। हालांकि इसमें कुछ असन्तुष्ट भाजपा विधायक भी पहले सक्रिय थे। लेकिन वक़्त संभालते हुए भाजपा व संघ परिवार ने चेतावनी देकर बिगड़ती स्तिथि को भांपकर नियंत्रित किया। मामले को पार्टी के भीतर ही खत्म कर दबा दिया गया।

 भुवनेश्वर में बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में अपने समापन भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को सत्ता में आने पर व्यवहार में संयम और सुख-सुविधाओं से बचने की नसीहत दी है।

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब हम विपक्ष में थे तब हमारा रहन-सहन जैसा था वैसा ही सत्ता में आने के बाद रहना चाहिए वर्ना हममें और उनमें (कॉंग्रेस) क्या फर्क रह जाएगा।

पीएम मोदी ने कहा कि हम लोग अपना घर-परिवार और सुख-सुविधा छोड़ कर आए हैं। लेकिन सत्ता में आने के बाद अगर उसी सुख-सुविधा, रहन-सहन और मानसिकता के साथ अगर रहने लगें जो हमसे पहले वालों की थी तो यहाँ आने का क्या मतलब?

उन्होंने कहा कि लोगों ने सब कुछ छोड़ कर अपना पूरा जीवन लगा दिया। पार्टी के किसी भी नेता के लिए कर्तव्य परिवार से पहले है। पीएम मोदी ने शुचिता और भ्रष्टाचार मुक्त आचरण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत फ़ायदों के लिए काम नहीं करना चाहिए।

पीएम मोदी की ये नसीहत ऐसे समय आई है जब कई कॉंग्रेसी नेताओं ने बीजेपी का दामन थामा है। हालांकि पार्टी नेताओं का कहना है कि दोनों बातों में संबंध नहीं है क्योंकि बीजेपी यह कहती आई है कि जो कोई भी बीजेपी की विचारधारा में विश्वास व्यक्त करता हो और साफ छवि का हो, बीजेपी में उसका स्वागत है।
उनके मुताबिक पीएम की नसीहत पार्टी नेताओं ख़ासतौर से मंत्रियों के लिए थी कि सत्ता में आने के बाद उन्हें अपने तौर-तरीके और रहन-सहन नहीं बदलना चाहिए।
कुलमिलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह व संघ परिवार में पार्टी में बढ़ते कांग्रेसी कल्चर से भयभीत ओर चिंतित हैं, जिससे संघ कल्चर ख़तरे में है। कोई भी अपने परिवार का भले ही त्याग कर सकता है किंतु अपने पतिवार के ज़ीन्स और सांस्कृति का किसी भी तरह कभी भी त्याग नहीं कर सकता।इसलिए अब संघ परिवार और भाजपा, कांग्रेस कल्चर के मिश्रण से “अर्धनारीश्वर” हो गया है। 


          ✍ -एस पी सिंह

     – लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार✍


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