भारत लाना इतना आसान नहीं है


 लंदन।बैंकों का कर्ज न चुकाने के आरोप में भारत में वांछित भगोड़े कारोबारी विजय माल्या को मंगलवार को लंदन में गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि कुछ ही घंटों बाद एक स्थानीय अदालत ने उन्हें जमानत दे दी।

भारतीय उद्योगपति विजय माल्या मंगलवार सुबह लंदन में गिरफ्तार कर लिए गए हैं। 
न्यूज़ एजेन्सियों के मुताबिक माल्या को प्रत्यर्पण वॉरंट के आधार पर गिरफ्तार किया गया है।

मेट्रोपॉलिटन पुलिस की तरफ से कहा गया कि भारत की तरफ से ये गिरफ्तारी की गई है।
उन्हें वेस्टमिनिस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में मंगलवार को ही पेश किया जाएगा।

इसी महीने स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की अगुवाई वाले कंसोर्टियम ने माल्या का गोवा स्थित किंगफिशर विला नीलाम किया था।

इस बंगले को तय राशि से कम कीमत में 73 करोड़ रुपये में बेचा गया. विजय माल्या के खिलाफ देश की कई अदालतों ने वॉरंट जारी कर रखा है.

प्रवर्तन निदेशालय माल्या के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की तफ्तीश कर रही है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सितंबर, 2016 में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी जांच के तहत उद्योगपति विजय माल्या की परिसम्पत्तियां ज़ब्त की थी।

समाचार एजेंसी के मुताबिक ज़ब्त की गई परिसम्पत्तियों की कीमत 6630 करोड़ रुपये थी।

विजय माल्या का पासपोर्ट रद्द

भारतीय विदेश मंत्रालय ने उद्योगपति विजय माल्या का पासपोर्ट रद्द कर दिया था।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने ट्वीट कर माल्या का पासपोर्ट रद्द करने की जानकारी दी थी।
विकास स्वरूप ने ट्वीट किया, “विजय माल्या से मिले जवाबों को देखते हुए और प्रवर्तन निदेशालय और हाल ही में उनके ख़िलाफ़ जारी ग़ैर ज़मानती वारंट्स को देखते हुए विदेश मंत्रालय ने उनका पासपोर्ट रद्द करने का फ़ैसला किया है।”

प्रवर्तन निदेशालय ने विजय माल्या का पासपोर्ट रद्द करने की मांग की थी।
विजय माल्या पर बैंकों का 9000 करोड़ रुपए से अधिक का बकाया है। माल्या अभी देश से बाहर हैं और कुछ ख़बरों के मुताबिक वे इन दिनों लंदन में हैं।
इससे पहले, विदेश मंत्रालय ने माल्या का ईडी की सिफ़ारिश पर माल्या का पासपोर्ट निलंबित कर दिया था। ईडी ने कहा था कि तीन बार नोटिस देने के बावजूद माल्या एजेंसी के सामने हाज़िर नहीं हुए थे।

बिहार पुलिस को भी चाहिए विजय माल्या
विजय माल्या के ख़िलाफ़ इंटरनेशनल वारंट जारी हुआ है, लेकिन बिहार में भी कोई उनसे बकाया वसूली की कोशिश कर रहा है।

बिहार के बेगूसराय ज़िले की अदालत ने माल्या की गिरफ़्तारी का वारंट जारी किया है।
शराब कारोबारी विजय माल्या की कंपनी यूबी इंजीनियरिंग ने बरौनी रिफ़ाइनरी के विस्तार के दौरान साल 2002 में रिलांयस कंपनी से एक ठेका लिया था।

इस ठेके के तहत कंपनी को बिहार के कुछ ज़िलों में ऑप्टिक फ़ाइबर केबल बिछाने और पेट्रोल पंप बनाने थे। यूबी इंजीनियरिंग ने यह ठेका आरबी कंस्ट्रक्शन नाम की एक स्थानीय कंपनी को दे दिया, आरबी कंस्ट्रक्शन को अररिया में केबल बिछाना और गया में पेट्रोल पंप बनाना था।

कंस्ट्रक्शन कंपनी ने काम किया और शुरू में उसे इसका कुछ भुगतान भी हुआ।

आरबी कंस्ट्रक्शन के मालिक रंजन कुमार के मुताबिक़, “क़रीब सवा दो करोड़ रुपए का काम जब ख़त्म हो गया तो हमारी कंपनी ने बकाया 1 करोड़ 52 लाख रुपए का बिल दिया। तब से पेमेंट में परेशानी होने लगी।”

“25 मई 2005 को यूबी इंजीनियरिंग ने हमें 25 लाख का चेक दिया जो 1 जून 2005 को बाउंस हो गया। इसी दौरान कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर सहित दूसरे लोग दफ़्तर छोड़कर भाग गए।’’

रंजन बताते हैं कि कई क़ानूनी नोटिस भेजने के बाद भी न तो जबाव मिला और न संपर्क हुआ। तब उन्होंने बेगूसराय कोर्ट में 18 अक्टूबर 2006 को केस दायर किया। ये केस यूबी इंजीनियरिंग के सीएमडी विजय माल्या और कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर दीपक पॉल के ख़िलाफ़ किया गया।
आरबी कंस्ट्रक्शन के वकील अजय कुमार बताते हैं कि कोर्ट ने यूबी इंजीनियरिंग के सीएमडी विजय माल्या और उनकी कंपनी के स्थानीय प्रोजेक्ट मैनेजर दीपक पॉल को समन जारी किए, पर वे कोर्ट में पेश नहीं हुए। इसके बाद कोर्ट ने दोनों के ख़िलाफ़ वारंट जारी किया है।”

विजय माल्या इस समय ब्रिटेन में हैं, उनका पासपोर्ट ज़ब्त कर लिया गया है।ऐसे में सवाल है कि क्या बेगूसराय अदालत के आदेश की तामील हो पाएगी?


विजय माल्या कैसे बने ‘किंग ऑफ़ बैड टाइम्स’

शराब उद्योग को भारत में एक नया आयाम देने वाले विजय माल्या बैंक उद्योग के ‘नन परफॉर्मिंग एसेट’ संकट के प्रतीक बन गए हैं।

विजय माल्या को ‘किंग ऑफ़ गुड टाइम्स’ कहा जाता था, पर आज यह एक मज़ाक बन चुका है।

जीवन भर माल्या की कोशिश ये रही है कि वे अपने कारोबार का दायरा बढ़ा कर अलग अलग व्यवसायों को इसमें शामिल करें, ताकि उन्हें महज़ शराब उद्योग के दिग्गज के तौर पर नहीं, एक उद्योगपति के रूप में देखा जाए।

शराब का व्यवसाय उन्हें पिता विट्ठल माल्या से विरासत में मिला था। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित मैनेजमेंट संस्थानों से लोगों को चुना और इस शराब उद्योग को एक कार्पोरेट रूप दिया।

लेकिन झटके में नई कंपनियां ख़रीदने की उनकी आदत और कई बार तो बिना बही-खाते की जांच के ही फ़ैसला लेने की वजह से विजय माल्या की यह हालत हो गई है।

के. गिरिप्रकाश ने विजय माल्या पर ‘द विजय माल्या स्टोरी’, नाम से एक किताब लिखी है।

गिरिप्रकाश ने दिए एक साक्षात्कार में कहा, “भारत में शराब व्यवसाय को अच्छी नज़रों से नहीं देखा जाता। माल्या चाहते थे कि लोग उन्हें शराब के बड़े व्यवसायी नहीं, बल्कि एक उद्योगपति के रूप में जानें।”

गिरिप्रकाश ने आगे जोड़ा, “वे इस ठप्पे से पीछा छुड़ाना चाहते थे। इसलिए माल्या ने इंजीनियरिंग, उर्वरक, टेलीविज़न और चार्टर विमान सेवा की कंपनियों में पैसे लगाए।”

यह सबको पता है कि शराब के व्यवसाय में 40 से 45 फ़ीसदी तक का मुनाफ़ा होता है। लेकिन माल्या ने किंगफ़िशर एयरलाइंस शुरू करने का फ़ैसला किया। इस क्षेत्र में पैसे कमाना मुश्किल होता है और अगर मुनाफ़ा होता भी है तो एक या दो प्रतिशत।

हालांकि माल्या ये कहते रहे हैं कि किंगफिशर एयरलाइंस, एसबीआई कैपिटल मार्केट्स और एक मशहूर अंतरराष्ट्रीय विमानन सलाहकार से सलाह मशविरा के शुरू की गई थी। अर्थव्यवस्था में उस समय उपजी स्थिति और सरकारी नीतियां कंपनी की बदहाली की वजहें रहीं।

विजय माल्या ने एक बयान में कहा, “व्यक्तिगत तौर पर मैंने कर्ज नहीं लिए हैं और न ही मैं डिफॉल्टर हूं।”

पाणि के मुताबिक़, “फिलहाल जारी व्यवस्था में आप उन दो लोगों में फ़र्क़ नहीं कर सकते हैं जो पैसे लेकर रफूचक्कर हो रहा है और जिसका बिज़नेस वाकई मुनाफ़ा नहीं कमा सका। विजय माल्या एक काफ़ी बड़ी समस्या के प्रतीक बन गए हैं। बैंक तो थोड़ा बहुत जोखिम उठाते ही हैं। लेकिन अगर इस बात में अंतर नहीं किया जा सका कि कोई कंपनी फेल हो गई है या कर्ज़दार पैसे लेकर चंपत हो गया है, तो पूरी व्यवस्था ही बैठ जाएगी।”

यह तो सबको पता है कि किंगफ़िशर एयरलाइन को अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनी बनाने के लिए माल्या ने कैप्टेन गोपीनाथ की कंपनी एयर डेकन ख़रीदी थी।

गिरिप्रकाश कहते हैं, “माल्या ने अपने यॉट से गोपीनाथ को फ़ोन किया कि वो एयर डेकन ख़रीदना चाहते हैं। गोपीनाथ ने कहा, एक हज़ार करोड़ रुपए. माल्या ने एयर डेकन की बैलेंस शीट तक नहीं देखी और गोपीनाथ को डिमांड ड्राफ़्ट भिजवा दिया।”


क्यों मुश्किल है विजय माल्या को भारत लाना?

भारत ने युनाइटेड स्पिरिट्स के पूर्व चेयरमैन और किंगफिशर कंपनी के मालिक विजय माल्या को ब्रिटेन से भारत लाने की कोशिश शुरू की थी और इसमें उसे बड़ी कामयाबी मिली।

समाचार एजेंसी के मुताबिक स्कॉटलैंड यार्ड ने माल्या को लंदन में गिरफ़्तार किया है।

इस मामले में विदेश मंत्रालय के ज़रिए भारत ने दिल्ली में ब्रिटिश उच्चायुक्त को एक आग्रह सौंपा था। माल्या बीते साल मार्च में देश छोड़कर ब्रिटेन चले गए थे।

लेकिन उन्हें भारत लाना इतना आसान नहीं है। और इसकी वजह है भारत-ब्रिटेन के बीच प्रत्यर्पण संधि की जटिल प्रक्रिया।

ब्रिटिश सरकार के मुताबिक बहुराष्ट्रीय कनवेंशन और द्विपक्षीय संधियों के तहत ब्रिटेन दुनिया के क़रीब 100 मुल्क़ों के साथ प्रत्यर्पण संधि रखता है। इनमें भारत कैटेगरी 2 के टाइप बी वाले मुल्क़ों में शामिल है।

ब्रिटिश सरकार की वेबसाइट में प्रत्यर्पण की प्रक्रिया से जुड़ा पूरा ब्योरा है. इसके मुताबिक भारत जिस श्रेणी में है, उसमें शुमार देशों से आने वाले आग्रह पर फ़ैसला ब्रिटेन का विदेश मंत्रालय और अदालतें, दोनों करते हैं।

इसकी प्रक्रिया काफ़ी लंबी है।

विदेश मंत्री से आग्रह किया जाएगा, जो इस बात का फ़ैसला करता है कि इसे सर्टिफ़ाई किया जाए या नहीं

जज निर्णय करता है कि गिरफ़्तारी के लिए वारंट जारी किया जाए या नहीं। इसके बाद शुरुआती सुनवाई होगी। फिर बारी आएगी प्रत्यर्पण सुनवाई की।

विदेश मंत्री फ़ैसला करता है कि प्रत्यर्पण का आदेश दिया जाए या नहीं।

आग्रह करने वाले देश को क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (CPS) को आग्रह का शुरुआती मसौदा सौंपने के लिए कहा जाता है, ताकि बाद में कोई दिक्कत पेश ना आए।

पहले ब्रिटिश गृह मंत्रालय की इंटरनेशनल क्रिमिनलिटी यूनिट इस आग्रह पर विचार करती है। अगर दुरुस्त पाया जाता है, तो इसे आग्रह अदालत को बढ़ा दिया जाता है।

अगर अदालत सहमत होती है कि पर्याप्त जानकारी उपलब्ध कराई गई है, तो गिरफ़्तारी वारंट जारी किया जाएगा। इसमें व्यक्ति विशेष से जुड़ी सारी जानकारी।

गिरफ़्तारी के बाद शुरुआती सुनवाई और प्रत्यर्पण सुनवाई होती है। सुनवाई पूरी होने के बाद जज संतुष्ट होता है तो मामले को विदेश मंत्रालय को बढ़ा दिया जाता है।

इसके बावजूद जिसके प्रत्यर्पण पर बातचीत हो रही है, वो शख़्स मामला विदेश मंत्रालय को भेजने के जज के फ़ैसले पर अपील कर सकता है।

मामले पर विचार के बाद विदेश मंत्रालय फ़ैसला लेता है। तीन सूरत ऐसी है, जिनके होने पर प्रत्यर्पण नहीं किया जा सकेगा:

अगर प्रत्यर्पण के बाद व्यक्ति के ख़िलाफ़ सज़ा-ए-मौत का फ़ैसला आने का डर हो तो।

अगर आग्रह करने वाले देश के साथ कोई विशेष इंतज़ाम हो तो।

अगर व्यक्ति को किसी तीसरे मुल्क़ से ब्रिटेन में प्रत्यर्पित किया गया हो तो।

ख़ास बात ये है कि विदेश मंत्रालय को मामला भेजने के दो महीने के भीतर फ़ैसला करना होता है. ऐसा ना होने पर व्यक्ति रिहा करने के लिए आवेदन कर सकता है। हालांकि विदेश मंत्री अदालत से फ़ैसला देने की तारीख़ आगे बढ़वा सकता है।

इस पूरी प्रक्रिया के बाद भी व्यक्ति के पास हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अधिकार रहता है। कुल मिलाकर माल्या के भारत लौटने का रास्ता काफ़ी जटिल और लंबा है।

पिछले साल मई में भारत सरकार ने ब्रिटेन से कहा था कि माल्या को लौटा दिया जाए क्योंकि उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया गया है।

ब्रिटिश सरकार का कहना था कि उनके यहां रहने के लिए किसी के पास वैध पासपोर्ट होना ज़रूरी नहीं, लेकिन क्योंकि माल्या के ख़िलाफ़ गंभीर आरोप है, इसलिए उनके प्रत्यर्पण पर विचार किया जाएगा।


माल्या की ‘लोन माफ़ी’ और नाराज़ जनता

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