कांग्रेस सहित विपक्ष के सभी दलों की एक बहुत जरूरी संयुक्त पहल:

यह शायद पहला मौका है जब देश की राजनीतिक परिस्थिति के सवाल पर कांग्रेस, सीपीएम, तृणमूल कांग्रेस, सीपीआई, आरजेडी, जेडीयू, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, एनसीपी, डीएमके, जेएमएम आदि 13 राजनीतिक दलों ने एक मंच पर इकट्ठा होकर एक स्वर में अपनी चिंताओं को व्यक्त किया। जाहिर है कि यह आज की ऐसी असामान्य राजनीतिक परिस्थितियों का दबाव है जिनकी कोई भी राजनीतिक दल अपने संपूर्ण नाश की कीमत पर ही अवहेलना कर सकता है।
 

कल (12 अप्रैल) इन सभी दलों के नेताओं का एक प्रतिनिधि-मंडल कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में राष्ट्रपति से मिल कर उन्हें मौजूदा चिंताजनक परिस्थितियों के बारे में एक ज्ञापन सौंपा। उस ज्ञापन में परिस्थिति का जो यथार्थ बयान है, उसके बाद यह साफ हो जाता है कि भारत में मोदी-शाह-आरएसएस के जनतंत्र-विरोधी अमर्यादित शासन की इन परिस्थितियों में चालू ढर्रे, जनतांत्रिक प्रतिद्वंद्विता की अब तक चली आ रही राजनीति के दिन लदते जा रहे हैं। हर अनैतिक उपाय से ये समाज का ध्रुवीकरण करने, संसद सहित सभी जनतांत्रिक और प्रशासनिक संस्थाओं को नष्ट करने, पुलिस बलों में नियुक्तियों से लेकर उनकी गतिविधियों को विपक्ष की आवाज को कुचलने और उनसे ब्लैक मेल करने के लिये मनमाने ढंग से नियंत्रित करने, न्यायपालिका तक को दबाव में लाने, यहां तक कि चुनाव प्रणाली को भी पूरी तरह से भ्रष्ट करने, कानून के शासन को धत्ता बताने और नागरिकों के मूलभूत अधिकारों, भारत के बहुलतावादी सांस्कृतिक वैविध्य का समाप्त करने पर तुले हुए हैं। 
राष्ट्रपति को दिये गये ज्ञापन में इस समूचे घटनाक्रम का सिलसिलेवार उल्लेख करते हुए कहा गया है कि देश शासन के एक तानाशाही ढांचे के उदय को साफ देख रहा है। पूरे समाज में आज भय व्याप्त है। राष्ट्रवाद और धार्मिक भावनाओं के नाम पर पूरे वातावरण को हिंसा से भर दिया गया है। ज्ञापन में विशेष तौर पर ईवीएम मशीनों में पाई जा रही गंभीर गड़बड़ियों के प्रसंग को भी भारी महत्व के साथ उठाया गया है। 
जाहिर है कि आज देश का समूचा विपक्ष इस बात को गहराई से महसूस करने लगा है कि अभी जो चल रहा है, उसे यदि उसी प्रकार चलने दिया गया तो यह हमारे देश में जनतंत्र और जनता के बीच आपसी भाईचारे के अंत की घोषणा के समान होगा। 

– अरुण माहेश्वरी, वरिष्ठ लेखक एवं स्तंभकार

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