​राहुल सांकृत्यायन की स्मृति में भारतीय विश्व कोश संस्थान की स्थापना की जाये


– 7 मार्च 1994 के दिन राज्य सभा में शून्यकाल में उठाया गया सरला माहेश्वरी का प्रस्ताव 
इसी 8 अप्रैल (1994) को महापंडित राहुल सांकृत्यायन के शताब्दी वर्ष का समापन होने जा रहा है। इस वर्ष के दौरान पूरे भारत में उनकी जन्मशती के अवसर पर अनेक प्रकार के कार्य किये गये। सरकारी स्तर पर भी एक कमेटी बनाकर कुछ आयोजन और समारोह किये गये। सरकार की सहायता से शायद एक-दो किताबें भी निकली हैं। लेकिन मेरे अनुसार इतना ही काफी नहीं है। राहुल सांकृत्यायन की तरह के व्यक्तित्व को जब हम याद करते हैं तो अपने समाज और संस्कृति के बारे में हमारी ज़िम्मेदारियाँ और ज़्यादा बढ़ जाती हैं।
राहुल सांकृत्यायन विश्वकोषीय ज्ञान के व्यक्ति थे। दुनिया के इतिहास में विश्व कोष के रचयिताओं नेनवजागरण

और ज्ञान प्रसार के क्षेत्र में जो महान कार्य किये उनसे हम सभी परिचित हैं।राहुल सांस्कृत्यायन ने भीहमारे समाज में बहुत काम किये। हमारा कर्तव्य है कि हमउनके काम को आगे बढ़ाएँ। 
इसीलिये मेरा सरकार से निवेदन हाकिम कोरी समारोह-धर्मिता से हटकर राहुल सांस्कृत्यायन की स्मृति में हमें कुछ 

अधिक ठोस कार्यों को हाथ में लेने की ज़रूरत है। मेरा प्रस्ताव हाकिम मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से एक भारतीय विश्व कोष संस्थान का गठन किया जाये और इस संस्थान के ज़रिये भारत की सभी भाषाओं में एक मानक विश्व कोष की रचना के काम को अपनाया जाये।यह संस्थान  भारतीय विश्व कोष को हमेशा समीचीन बनाये रखने के लिये उसी प्रकार नियमित रूप से काम करता रहेगा जिस प्रकार ब्रिटानिया इनसाइक्लोपीडिया या अमेरिकन  इनसाइक्लोपीडिया की तरह के विश्व स्तर के मानक कोशों में लगातार काम किया जाता है।
यह काम हमारे राष्ट्र के लिये अत्यंत ज़रूरी काम है। इसे कुछ निजी प्रकाशकों के भरोसे नहीं छोड़ देना चाहिये। राष्ट्रीय संस्कृति नीति के एक अभिन्न अंग के रूप में इसे ग्रहण करना चाहिये। राहुल सांकृत्यायन की जन्म शताब्दी वर्ष इस कार्य को शुरू करने का सबसे उचित समय है। इसके लिये सरकार से हमारा निवेदन है कि इस आशय की घोषणा वह इसी वर्ष करे।
(राज्य सभा में सरला माहेश्वरी ने शून्य काल में इस माँग को रखा।)

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